मुसलमान भारत में सेकंड नहीं, फर्स्ट-क्लास नागरिक हैं: मौलाना शहाबुद्दीन

बरेली, 31 अक्टूबर . जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के India में मुसलमानों की स्थिति को लेकर दिए गए बयान पर मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने मदनी की बातों से असहमति जताते हुए कहा कि India में मुसलमान दूसरे दर्जे के नागरिक नहीं, बल्कि प्रथम श्रेणी के नागरिक हैं. यहां उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता और समान अधिकार प्राप्त हैं. मुसलमान देश में आजादी के साथ अपना कारोबार करते हैं, धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं और अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन जीते हैं. मौलाना ने लोगों से अपील की कि देश की वास्तविक स्थिति को नकारात्मक नजरिए से देखने के बजाय सकारात्मक सोच के साथ समझें.
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि मौलाना महमूद मदनी को यह समझना चाहिए कि India में मुसलमानों को आजादी हासिल है. यहां वे अन्य नागरिकों की तरह सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं. मुसलमानों को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने, कारोबार करने और रोजमर्रा की जिंदगी अपनी इच्छा के अनुसार गुजारने की स्वतंत्रता है. India में मुसलमान पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं और जुमे की नमाज के साथ ईद, बकरीद और ईद मिलादुन्नबी मनाते हैं. इसके अलावा मोहर्रम, जुलूस-ए-गौसिया और अन्य धार्मिक जुलूस भी अपनी परंपराओं के अनुसार निकाले जाते हैं. इन धार्मिक आयोजनों और इस्लामी रीति-रिवाजों के पालन में मुसलमानों को स्वतंत्रता प्राप्त है.
उन्होंने कहा कि देश में मुस्लिम शिक्षा संस्थान और अन्य धार्मिक स्थल भी स्वतंत्र रूप से संचालित हो रहे हैं. इन संस्थानों पर न तो Government का कोई पहरा है और न ही किसी गैर-मुस्लिम का. ऐसे में India में मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बताना उचित नहीं है. इस तरह की धारणा नकारात्मक सोच का परिणाम है और इससे समाज में अनावश्यक भ्रम पैदा होता है.
मौलाना शहाबुद्दीन ने स्वीकार किया कि देश में एक-दो जगह इस तरह की घटनाएं हुई हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में कभी-कभी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं. उन्होंने India की आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 145 करोड़ लोगों के देश में किसी भी तरह की घटना को पूरी आबादी या किसी एक समुदाय की स्थिति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को हिंदू-मुस्लिम या भाजपा-कांग्रेस के नजरिए से देखना भी ठीक नहीं है. उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुस्लिम शासकों के दौर में भी ऐसी घटनाएं होती थीं और उस समय के शासकों को भी उन्हें नियंत्रित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. इसी तरह ब्रिटिश शासन के दौरान भी इस प्रकार की घटनाएं होती थीं. इसलिए किसी घटना के आधार पर पूरे देश या किसी समुदाय के बारे में नकारात्मक धारणा बनाना उचित नहीं है.
मौलाना शहाबुद्दीन ने लोगों से अपील की कि वे सकारात्मक नजरिया अपनाएं और India में मुसलमानों की स्थिति को खुले मन से देखें. देश की खूबसूरती इसी में है कि यहां अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग आजादी के साथ रहते हैं. सभी को अपने धर्म और परंपराओं के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को डर और खौफ के माहौल में रहने की जरूरत नहीं है. यह देश उनके बुजुर्गों की सरजमीन है और उनके पूर्वजों ने भी India की आजादी में योगदान दिया है. ऐसे में उन्हें अपनी नागरिकता और अधिकारों को लेकर भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है. मौलाना शहाबुद्दीन ने आगे कहा कि India में मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बताना सही नहीं है.
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पीएसके/वीसी


