‘मुख्य चुनाव आयुक्त का रवैया शर्मनाक’, मणिशंकर अय्यर ने उठाए सवाल

श्रीनगर, 4 अक्टबर . पूर्व Union Minister मणिशंकर अय्यर ने रेडिसन होटल में आयोजित हल्ला बोल कार्यक्रम में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण पर अपनी बात रखी.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘अवैध Government’ वाले बयान पर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा, “मैं उनसे सहमत नहीं हूं. मेरा मानना ​​है कि चुनाव आयोग हाल तक पूरी तरह से स्वायत्त रूप से कार्य कर रहा था. और मुझे नहीं लगता कि किसी संवैधानिक निकाय को विधिवत रूप से स्वायत्त बनाना आवश्यक है. सर्वोच्च न्यायालय को स्वायत्त नहीं कहा जाता है. यह एक संवैधानिक निकाय है. इसलिए, इसे संवैधानिक निकाय बनाकर आप स्वतः ही इसकी स्वायत्तता सुनिश्चित कर लेते हैं. लेकिन फिर इसमें गड़बड़ी कर दी गई है. इन आयुक्तों और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है.”

कांग्रेस नेता अय्यर ने कहा, “मुझे लगता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार शर्मनाक है, और उनके दोनों चुनाव आयुक्तों का व्यवहार भी उचित नहीं है क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से टेलीविजन पर उन 14 या 15 के नोटों का समर्थन नहीं किया है जो उनके पास हैं…”

पूर्व Union Minister ने कहा, “वे जो कर रहे हैं वह गैरकानूनी है. मैं मानता हूं कि वे स्वयं निर्वाचित हुए हैं. हालांकि, निर्वाचित होने के बाद उनके द्वारा की गई कार्रवाइयों पर काफी संदेह है.” अय्यर ने यह टिप्पणी कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के उस बयान पर की, जिसमें उन्होंने कहा कि था कि चुनाव प्रक्रिया में विसंगती होने के कारण Narendra Modi अवैध Prime Minister हैं और सारे Chief Minister भी अवैध हैं.

Pakistan और चीन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा, “मैंने इस पर विस्तार से चर्चा की है. यहां इतनी विस्तार से समझाना संभव नहीं है. लेकिन हमें पाखंडी समझा जा रहा है. क्योंकि हम दुनिया को बताते हैं कि यह युद्ध का युग नहीं है, और फिर हम Pakistan के साथ युद्ध छेड़ देते हैं. हम कहते हैं कि कूटनीति और संवाद होना चाहिए. एकमात्र देश जिसके साथ हमारी कूटनीति और संवाद नहीं है, वह Pakistan है. और चीन के साथ, हमने क्वाड में शामिल होकर उन्हें नाराज कर दिया है. और अब तो अमेरिका भी कह रहा है कि क्वाड का कोई महत्व नहीं है. तो यह किस तरह की कूटनीति है? इसका हमारी रणनीतिक स्वायत्तता से कोई लेना-देना नहीं है. इसका संबंध दोनों पक्षों को बीच में फंसाने की कोशिश से है. यह लेन-देन है, नैतिक नहीं.”

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एमएस/

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