
गांधीनगर, 5 अक्टूबर . भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने कांग्रेस नेता इमरान मसूद, दिग्विजय सिंह और मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणियों के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर Supreme Court की सुनवाई को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के वीरों के सम्मान के मामले में भी राजनीति करना कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति को दर्शाता है.
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहन गुप्ता ने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार वैश्विक स्तर पर सम्मान पाने वाले नायक हैं. पूरी दुनिया के नेताओं ने उनकी बहादुरी की सराहना की, लेकिन कांग्रेस की ओर से उनके सम्मान में एक शब्द तक नहीं कहा गया. अगर देश के वीरों के सम्मान में भी राजनीति आड़े आती है, तो यह शर्म की बात है. यह किसी Political दल या भाजपा का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश के एक वीर की बहादुरी का विषय है. कांग्रेस हर मुद्दे में राजनीति करती है और जब देश व देश के वीरों के सम्मान की बात आती है, तब भी Political हितों को ऊपर रखती है.
उन्होंने कहा कि देश की जनता ऐसी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी. रोहन गुप्ता ने सवाल उठाया कि जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के नेताओं ने कैप्टन की बहादुरी की सराहना की, तो कांग्रेस के लिए ऐसा करने में क्या परेशानी थी.
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की पदयात्रा को लेकर रोहन गुप्ता ने उन पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ही ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्दों को चर्चा में लाया था. रोहन गुप्ता ने आरोप लगाया कि देश पर हुए हमलों के संदर्भ में भी दिग्विजय सिंह की ओर से हिंदुओं को लेकर सवाल उठाए गए थे.
उन्होंने कहा कि ऐसे में आज हिंदू धर्म और सनातन की बात करने का नैतिक आधार क्या है. रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर सनातन के विरोध में बोलने वालों को Political संरक्षण देने और भगवान राम के अस्तित्व को लेकर सवाल उठाने वालों के साथ खड़े होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई मुद्दों पर चुप्पी साधी और अब हिंदू धर्म और सनातन की बात कर रही है. दिग्विजय सिंह की पदयात्रा कांग्रेस की बदलती Political स्थिति को दिखाती है. दिया जब बुझने वाला होता है तो ज्यादा फड़फड़ाता है और कांग्रेस की मौजूदा स्थिति भी उन्हें कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर Supreme Court द्वारा उन्हें तत्काल निलंबित करने से इनकार किए जाने पर भी रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने मामले में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और अब इस पर अनावश्यक राजनीति नहीं होनी चाहिए. चुनाव हारने के बाद विपक्षी दल अपनी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग या अन्य संस्थाओं पर आरोप लगाते हैं. अगर चुनाव आयोग की प्रक्रिया गलत है तो जिन राज्यों में कांग्रेस चुनाव जीतती है, वहां उसी प्रक्रिया को सही क्यों माना जाता है.
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कमियां हो सकती हैं और सुधार की गुंजाइश भी हमेशा रहती है, लेकिन हर चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. Supreme Court ने भी यह संकेत दिया कि केवल किसी अखबार की खबर या लेख के आधार पर गंभीर आरोपों को सही नहीं माना जा सकता. गुप्ता ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जिन राज्यों में उसे चुनावी सफलता मिलती है, वहां उसे व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया में कोई समस्या नजर नहीं आती, लेकिन जहां उसे हार मिलती है, वहां चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाते हैं.
उन्होंने कहा कि केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की Government होने पर वहां की चुनावी प्रक्रिया को लेकर इस तरह के सवाल नहीं उठाए जाते, जबकि दूसरी जगह हार मिलने पर चुनाव आयोग को निशाना बनाया जाता है. यह रवैया चुनावी हार स्वीकार नहीं करने की मानसिकता को दिखाता है.
रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि Political दलों को संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए. चुनाव में हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और हार के बाद लगातार किसी अन्य संस्था पर दोष मढ़ना समाधान नहीं है.
उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुए छात्र संघ चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस की राजनीति के बावजूद उसे हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने सवाल किया कि ऐसी हार के लिए भी क्या कांग्रेस किसी दूसरी संस्था को जिम्मेदार ठहराएगी. विपक्ष को अपनी Political रणनीति और संगठन के भीतर की कमियों पर विचार करना चाहिए. हर चुनावी हार का ठीकरा किसी अन्य संस्था पर फोड़ने की राजनीति लंबे समय तक नहीं चल सकती और जनता अब इस रवैये को समझ रही है.
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पीएसके/वीसी