मातृ स्वास्थ्य के लिए यूएनएफपीए इंडिया की नई एडवोकेट बनीं मसाबा गुप्ता

New Delhi, 23 सितंबर . संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) इंडिया ने फैशन डिजाइनर और उद्यमी मसाबा गुप्ता को मातृ स्वास्थ्य के लिए अपना नया एडवोकेट नियुक्त किया है. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब India रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को समाप्त करने के 2030 के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के करीब पहुंच चुका है.

यूएनएफपीए इंडिया ने बताया कि India ने वर्ष 2000 से 2023 के बीच मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) में 73 प्रतिशत की कमी दर्ज की है. वर्ष 2022-24 में देश का एमएमआर घटकर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 हो गया है, जो अब 2030 तक प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम लाने के वैश्विक लक्ष्य के बेहद करीब है.

संस्था के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संस्थागत प्रसव, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में दो दशकों से अधिक समय तक किए गए निवेश ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इससे खासकर वंचित समुदायों की बड़ी संख्या में महिलाओं की जान बचाई जा सकी है.

मसाबा गुप्ता एक वर्ष तक यूएनएफपीए इंडिया के साथ मिलकर मातृ स्वास्थ्य को लेकर डिजिटल जागरूकता अभियान, जनसंवाद और जमीनी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़ेंगी. उनका उद्देश्य गर्भावस्था, प्रसव और शुरुआती मातृत्व के दौरान महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बनाना है.

मसाबा गुप्ता ने कहा, “मातृत्व एक महिला से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से क्या कीमत वसूलता है, इसके बारे में कोई नहीं बताता. बच्चे के जन्म के बाद पूरा ध्यान बच्चे पर चला जाता है, जबकि सबसे अधिक देखभाल की जरूरत मां को होती है. मैं यूएनएफपीए के साथ इसलिए जुड़ी हूं क्योंकि यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि वर्षों से मातृ स्वास्थ्य पर किया गया वास्तविक काम है.”

यूएनएफपीए इंडिया की प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोजनार ने कहा कि मातृ मृत्यु में कमी यह दिखाती है कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, निरंतर सार्वजनिक निवेश और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं. उन्होंने कहा कि India ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब लक्ष्य हर महिला को गर्भावस्था से लेकर प्रसव और उसके बाद तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करना है.

यूएनएफपीए इंडिया ने बताया कि मसाबा गुप्ता अब संगठन के उन प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में शामिल हो गई हैं, जो महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का काम करेंगे. इस पहल में Actress कृति सेनन जेंडर समानता की राष्ट्रीय एंबेसडर और सोहा अली खान यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एवं अधिकारों की एडवोकेट के रूप में पहले से जुड़ी हुई हैं.

डीएससी

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