तीनों चुनाव आयुक्त बराबर, सीईसी बॉस नहीं, राष्ट्रपति के पास जाएं आयुक्त : पृथ्वीराज चव्हाण

New Delhi, 23 सितंबर . चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद Maharashtra के पूर्व Chief Minister और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसके तीनों चुनाव आयुक्तों की संवैधानिक स्थिति बराबर है.

चव्हाण ने मांग की कि Supreme Court इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान ले और जरूरत पड़ने पर सभी चुनाव आयुक्तों को अदालत के सामने बुलाकर स्थिति स्पष्ट कराए.

पृथ्वीराज चव्हाण ने से बात करते हुए कहा, “कानून बिल्कुल साफ है कि तीनों चुनाव आयुक्त बराबर हैं. उनके पद में कोई छोटा-बड़ा नहीं है. मुख्य चुनाव आयुक्त बाकी दो आयुक्तों का बॉस नहीं होता. सभी फैसले मिलकर लिए जाने चाहिए, और अगर आम सहमति नहीं बन पाती है, तो आयोग को बहुमत के नियम के आधार पर काम करना होता है. अगर तीन में से दो लोग कुछ अलग कह रहे हैं और फिर भी फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जा रहे हैं, तो यह एक गंभीर मामला है.”

चव्हाण ने कहा, “हमें पता चला है कि दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सेक्रेटरी तक शिकायत की थी कि कामकाज सही नहीं चल रहा है. हमसे बिना पूछे विशेषकर एसआईआर प्रक्रिया में निर्णय लिए जा रहे हैं. मैं मानता हूं एसआईआर अपनी जगह है, उसका मामला Supreme Court में चल रहा है. लेकिन यह बुनियादी मामला है कि संवैधानिक संस्था क्या संविधान से परे काम करेगी?”

पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, “देखिए, आज जो खबर छपी है और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जो बातें सामने आई हैं, वे एक बहुत गंभीर मुद्दा उठाती हैं. यह मामला एसआईआर से भी आगे की बात है. चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है. चुनाव आयोग को आम सहमति से फैसले लेने चाहिए, जिसमें सभी लोग फैसला लेने की प्रक्रिया में शामिल हों. अगर ऐसा मुमकिन न हो, तो बहुमत की राय मानी जाएगी. आपने हमारे संविधान के मूल ढांचे और निष्पक्ष चुनाव कराने के हमारे मौलिक अधिकार पर हमला किया है. इसलिए, मैं इसे बहुत गंभीर मामला मानता हूं.”

इसके साथ ही उन्होंने कहा, “वह केवल दो जगह अपील कर सकते हैं, Supreme Court के मुख्य न्यायाधीश के पास या President के पास, लेकिन उन्होंने ब्यूरोक्रेटिक हेड जो होता है, उसके पास जाने की कोशिश की. आज वह जिस पद पर बैठे हैं, वह Governmentी नौकर नहीं हैं. वह एक संवैधानिक पद पर बैठे संवैधानिक व्यक्ति हैं. उनकी अपील केवल Supreme Court के न्यायाधीश और President के पास ही जा सकती है. उन्हें अपील करनी चाहिए.”

चव्हाण ने कहा, “मेरी मांग है कि Supreme Court इस मामले का स्वतः संज्ञान ले और दखल दे. सभी आयुक्तों को कोर्ट के सामने बुलाया जाना चाहिए. क्या संवैधानिक व्यवस्था को तोड़ा मरोड़ा गया है? इसके ऊपर Supreme Court आर्टिकल 32 और आर्टिकल 142 के तहत एक न्यूजपेपर रिपोर्ट के आधार पर संज्ञान लेकर मुकदमा चलाए और संविधान को बचाए. यह मेरी मांग है.”

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एसएके/एबीएम

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