मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा रवाना; सीएम पुष्कर धामी ने लिखा-गहरी आस्था का अद्भुत प्रतीक

देहरादून, 6 सितंबर . उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिद्धपीठ मां नंदा देवी की 12 वर्ष बाद आयोजित होने वाली बड़ी जात यात्रा कुरुड़ में नंदा देवी धाम से कैलास के लिए Saturday को रवाना की गई. Chief Minister पुष्कर सिंह धामी की ओर से Sunday को social media पर अपील की गई कि चमोली जिले में आगमन पर यहां दर्शन अवश्य करें.

Chief Minister पुष्कर सिंह धामी की ओर से social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा गया, “कुरुड़, चमोली स्थित सिद्धपीठ मां नंदा देवी मंदिर भक्ति, आस्था और हिमालयी संस्कृति का दिव्य संगम है. उत्तराखंड की समृद्ध परंपरा से जुड़ा यह पावन स्थल अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए विशेष पहचान रखता है. कुरुड़ से जुड़ी नंदा देवी की लोकजात और राजजात यात्रा उत्तराखंड की जीवंत लोकपरंपराओं और गहरी आस्था का अद्भुत प्रतीक है. चमोली जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें.”

कुरुड़ में स्थित नंदा देवी धाम को मां का मूल मायका माना जाता है. इस मंदिर में मां नंदा देवी (पार्वती) चतुर्भुज स्वयं-भू शिला मूर्ति के रूप में विराजमान हैं. कुरुड़ धाम में मां नंदा देवी की डोली दो मुख्य रुपों (कुरुड़ बधाण और कुरुड़-दशोली) में निवास करती है.

मां नंदा देवी की 12 वर्ष में आयोजित होने वाली बड़ी जात यात्रा Saturday को शुरू हुई है. इस यात्रा में पांच निर्जन और 21 आबादी वाले पड़ाव रहेंगे. पैदल गुजरने वाली यह यात्रा 296 किलो मीटर दूरी तय कर 20 सितंबर को (कैलास/होमकुंड) पहुंचेगी. इसके बाद मां की डोली वापस लौटेगी. 30 सितंबर को इस यात्रा का समापन होगा. इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए विवाहित बेटियां मायके पहुंचती हैं.

कुरुड़ बधाण मां नंदा देवी की डोली हर वर्ष लोकजात यात्रा में बधाण क्षेत्र में आती है. वेदनी कुंड में पूजा करने के बाद अपने ननिहाल देवराड़ा मंदिर वापस लौट जाती है. इस लोकजात में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. छह महीने देवड़ा में निवास करने के बाद मां की डोली मकर संक्रांति के दिन कुरुड़ धाम, मायके में विराजमान होती है.

एसडी/पीएम

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