महाराष्ट्र कांग्रेस का आरोप, जाति जनगणना के बहाने ओबीसी को सामान्य वर्ग में डालना चाहती है सरकार

Mumbai , 11 सितंबर . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और Maharashtra प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने Friday को केंद्र Government पर आरोप लगाया कि जाति जनगणना के नाम पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय को गुमराह किया जा रहा है.

Maharashtra के Governor जिष्णु देव वर्मा से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में पटोले ने दावा किया कि केंद्र Government जनगणना प्रक्रिया के माध्यम से ओबीसी आबादी को सामान्य (जनरल) वर्ग में शामिल करने की कोशिश कर रही है.

पटोले ने कहा कि जनगणना प्रपत्र में शामिल 40 सवालों में से प्रश्न संख्या 10 से यह संकेत मिलता है कि ओबीसी समुदाय को सामान्य वर्ग के अंतर्गत दर्ज करने की योजना बनाई जा रही है.

उन्होंने कहा कि ओबीसी समुदाय में अनेक जातियां और उपजातियां शामिल हैं, जैसे कुणबी और बंजारा, जिनके अलग-अलग राज्यों में अलग नाम हैं. उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश में बंजारा समुदाय को लम्टा कहा जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में कुछ समुदायों को कुर्मी या जाट नामों से जाना जाता है.

पटोले ने कहा कि भाषाई और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर जातियों के वर्गीकरण को अद्यतन करने की जरूरत है, ताकि जातिवार जनगणना में इन समुदायों की सही पहचान दर्ज हो सके.

उन्होंने केंद्र Government से मांग की कि वह बिहार और तेलंगाना Governmentों द्वारा पहले कराई गई व्यापक जातीय सर्वेक्षण की तर्ज पर जाति जनगणना कराए, जिससे सभी समुदायों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके.

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा Prime Minister को लिखे गए पत्रों के बावजूद केंद्र Government ने इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया है. उन्होंने इसे Government की ‘ओबीसी विरोधी मानसिकता’ का परिचायक बताया.

Governor को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा और रोजगार नीतियों के निर्माण के लिए अद्यतन और वास्तविक जनसांख्यिकीय आंकड़े आवश्यक हैं.

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि राष्ट्रीय जनगणना प्रपत्र में ओबीसी के लिए अलग और स्पष्ट श्रेणी का प्रावधान किया जाए. उनका कहना था कि ओबीसी के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक जाति और उपजाति की स्वतंत्र एवं सटीक गणना से विभिन्न समूहों के बीच मौजूद सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक असमानताओं को समझने में मदद मिलेगी.

ज्ञापन में शिक्षा, आर्थिक स्थिति, रोजगार में भागीदारी और Governmentी योजनाओं के लाभ के उपयोग का व्यापक आंकड़ा एकत्र करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, ताकि वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ नीति निर्माण किया जा सके.

पटोले ने Maharashtra Government से भी हस्तक्षेप करने की मांग की और कहा कि राज्य Government को केंद्र के संबंधित मंत्रालयों के समक्ष स्वतंत्र जातीय जनगणना की जोरदार पैरवी करनी चाहिए.

इस दौरान उन्होंने राज्य में कृषि संकट का मुद्दा भी उठाया. पटोले ने कहा कि विदर्भ, पश्चिमी Maharashtra और मराठवाड़ा के कई हिस्सों में लंबे सूखे के कारण खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं.

उन्होंने राज्य Government से प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने, किसानों और कृषि मजदूरों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने तथा पशुओं के लिए चारे और पानी की व्यवस्था करने की मांग की.

पटोले ने कहा कि राज्य Government को कर्नाटक की तर्ज पर राहत उपाय लागू करने चाहिए, ताकि संकटग्रस्त किसानों को राहत मिल सके.

–आईएएनए

एएमटी/डीकेपी

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