
चेन्नई, 6 अक्टूबर . मद्रास हाई कोर्ट ने ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के कर्मचारी का शव बिना कोई सैंपल या अन्य सामग्री लिए ही जलाने पर Police की आलोचना की है. इसके साथ ही 10 दिनों में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
कुड्डालोर जिले के नेल्लिकुप्पम के रहने वाले टी. बालाजी स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के पनरुति डिपो में काम करते थे. बालाजी 2024 में अचानक लापता हो गए. उनकी बेटी श्रीदेवी की शिकायत पर नेल्लिकुप्पम Police ने एक साल बाद 2025 में मामला दर्ज किया.
इस बीच श्रीदेवी को खबर मिली कि बालाजी कोयम्बेडु बस टर्मिनस पर मृत पाए गए थे. जब वह कोयम्बेडु बस टर्मिनस Police स्टेशन गईं और पूछताछ की, तो Police ने कथित तौर पर सही जवाब नहीं दिया. बाद में उन्हें पता चला कि ‘उदवुम करंगल’ नाम की एक संस्था के जरिए उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया था.
श्रीदेवी को यह भी पता चला कि हैदराबाद की रहने वाली उमा नाम की एक महिला ने उनका डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) हासिल कर लिया था. इसके बाद श्रीदेवी ने हाई कोर्ट का रुख किया और अपने पिता की मौत के हालात की सीबी-सीआईडी से जांच कराने के आदेश की मांग की. अपनी याचिका में श्रीदेवी ने कोयम्बेडु Police को निर्देश देने की मांग की कि वे पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, शव के अंतिम संस्कार से संबंधित प्रमाण पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराएं.
जब जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन के सामने मामले की सुनवाई हुई, तो Police ने बताया कि बालाजी का शव पहले ही जलाया जा चुका था. Police के अनुसार, जब उन्होंने बालाजी की जेब में मिले फोन नंबर पर संपर्क किया, तो हैदराबाद की उमा नाम की महिला ने दावा किया कि वह उनका भाई है. इसलिए Police ने शव उसे सौंप दिया.
Police ने आगे बताया कि शव जलाने से पहले कोई फिंगरप्रिंट, जेनेटिक सैंपल या कोई अन्य सैंपल नहीं लिया गया था और फिलहाल, तस्वीर के अलावा कुछ भी उपलब्ध नहीं है.
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि Police ने उसके पिता के शव का अंतिम संस्कार इस तरह से किया कि उनकी पहचान करना नामुमकिन हो गया, जिससे यह शक पैदा हुआ कि Police ने अंग तस्करी में शामिल किसी गिरोह के साथ मिलीभगत की थी. दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जज ने Police से पूछा, “आप बिना एक भी सैंपल लिए शव का अंतिम संस्कार कैसे कर सकते थे?”
इसके बाद जज ने नेल्लिकुप्पम Police को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता की शिकायत के आधार पर उसके पिता के लापता होने के मामले की जांच करें और 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट दाखिल करें. इसके बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई.
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ओपी/एबीएम