
इंफाल, 7 सितंबर . मणिपुर के Chief Minister युमनाम खेमचंद सिंह ने Monday को कहा कि मई 2023 में राज्य में भड़की जातीय हिंसा के बाद राज्य Government उन लोगों से जुड़े गैर-कानूनी और आपराधिक गतिविधियों के विभिन्न मामलों की जांच कर रही है.
मणिपुर विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस विधायक कंगुजम रंजीत सिंह की ओर से शुरू की गई कम समय की चर्चा में हिस्सा लेते हुए Chief Minister ने कहा कि 3 मई 2023 को भड़की अभूतपूर्व हिंसा ने कई युवाओं को हथियार उठाने पर मजबूर कर दिया.
उन्होंने सदन को बताया, “उनमें से कुछ की नीयत अच्छी थी, लेकिन कुछ ऐसे भी हो सकते हैं जो आपराधिक गतिविधियों में शामिल हों.”
खेमचंद सिंह ने आगे कहा कि राज्य Government ने पहाड़ी और घाटी इलाकों में काम करने वाले ‘विलेज वॉलंटियर्स’ या ‘अरामबाई टेंगगोल’ को प्रतिबंधित संगठन घोषित नहीं किया है और Police ने इन समूहों से जुड़े होने के आधार पर कोई मामला दर्ज नहीं किया है.
उन्होंने कहा कि Police द्वारा की गई गिरफ्तारियां व्यक्तिगत स्तर पर की गई आपराधिक गतिविधियों पर आधारित हैं.
Chief Minister ने कहा कि मणिपुर Police पहले एक बहुत मजबूत बल थी, लेकिन 3 मई, 2023 को शुरू हुए अभूतपूर्व जातीय संकट के बाद उसका मनोबल गिर गया है. उन्होंने कहा कि अब Government Police बल को मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
सीएम खेमचंद सिंह ने कहा कि राज्य Government जातीय हिंसा के दौरान किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस नहीं ले सकती.
Chief Minister ने आगे कहा कि जिन लोगों पर मामले दर्ज किए गए हैं, उनके मामलों की एक-एक करके जांच की जाएगी और इसमें समय लगेगा.
दूसरी ओर, गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने 2024 में Government द्वारा लिए गए उस फैसले को दोहराया, जिसके तहत उन लोगों पर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा जो सुरक्षा बलों पर हमले, जबरन वसूली, हत्या, बलात्कार या किसी अन्य आपराधिक गतिविधि जैसे गंभीर अपराधों में शामिल नहीं हैं.
उन्होंने आगे कहा कि जो युवा गंभीर अपराधों में शामिल नहीं हैं, उन्हें बचाना Government की जिम्मेदारी है.
गृह मंत्री ने कहा कि Government व्यक्तिगत मामलों की जांच करेगी. उन्होंने कहा कि Police संकट में शामिल होने के आरोपी किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं करती है.
युवाओं को परेशान करने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए, गोविंदस सिंह ने सदन को यह भी बताया कि Chief Minister ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एनआईए सहित विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा ‘सुओ-मोटो’ (स्वतः संज्ञान) मामलों में नामजद लोगों से पूछताछ के बाद उन्हें जल्द से जल्द रिहा कर दें.
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एससीएच/डीकेपी