भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा मजबूत होगी, बीएसएफ डीजी ने जमीन देने पर सरकार का जताया आभार

कोलकाता, 15 अक्टूबर . सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक (डीजी) प्रवीण कुमार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर पश्चिम बंगाल के Chief Minister और राज्य Government को धन्यवाद दिया है.
Thursday को जारी बयान में कहा गया, “बीएसफ डीजी ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जमीन देने पर Chief Minister और राज्य Government का आभार जताया. इससे बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड को मजबूत करने और सीमा पर बाड़ लगाने में रह गई कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी.”
डीजी कुमार ने 14 अक्टूबर को Chief Minister सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की और उन्हें भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा सुरक्षा हालात के बारे में जानकारी दी.
India और बांग्लादेश के बीच 4,096.7 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 2,216.7 किलोमीटर का हिस्सा पश्चिम बंगाल में पड़ता है. राज्य में यह सीमा दक्षिण में सुंदरबन से लेकर उत्तर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक फैली हुई है.
बैठक के दौरान डीजी कुमार ने Chief Minister को पश्चिम बंगाल में बीएसएफ की तैयारियों और सीमा के उन हिस्सों को सुरक्षित करने के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों के बारे में जानकारी दी, जहां अभी तक बाड़ नहीं लगाई गई है.
गृह मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा का लगभग 569 किलोमीटर हिस्सा बिना बाड़ वाला है. इसमें से लगभग 113 किलोमीटर का हिस्सा नदी वाला क्षेत्र है, जहां पारंपरिक तरीके से बाड़ लगाना संभव नहीं है.
बांग्लादेश से सटी सीमा वाले अन्य राज्यों के विपरीत पश्चिम बंगाल में बीएसएफ दो फ्रंटियर दक्षिण बंगाल फ्रंटियर और उत्तर बंगाल फ्रंटियर के जरिए काम करती है.
सत्ता में आने के बाद सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा Government ने सीमा पर बाड़ लगाने और बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) के निर्माण के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपना शुरू कर दिया. नौ जिलों में लगभग 1,024 एकड़ जमीन इस बल को सौंपने के लिए मंजूर कर ली गई है.
राज्य Government का कहना है कि पिछली Government के समय हुई देरी की वजह से सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास का काम रुक गया था.
एक सूत्र ने बताया, “बैठक में सीमा पर अवैध घुसपैठ और अन्य अपराधों को रोकने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल पर चर्चा हुई. इसके अलावा, जीरो-लाइन पर बसे गांवों को दूसरी जगह बसाने की जरूरत पर भी बात हुई.”
‘जीरो-लाइन’ गांव वे बस्तियां हैं जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से 150 गज के दायरे में स्थित हैं. इनमें से कई गांव सीमा पर लगी बाड़ के उस पार हैं, जबकि कुछ इलाकों में इनकी मौजूदगी की वजह से बाड़ लगाना मुश्किल हो गया है.
पश्चिम बंगाल में लगभग 360 ‘जीरो-लाइन’ गांव हैं, जिनकी कुल आबादी करीब 70,000 है. इनकी स्थिति के कारण बीएसएफ को कामकाज में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए बीएसएफ ने इन्हें दूसरी जगह बसाने (रीलोकेशन) की मांग की है.
सीएम अधिकारी ने बीएसएफ के महानिदेशक (डीजी) को भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को सुलझाने में राज्य Government पूरा सहयोग देगी. उन्होंने यह भी कहा कि Government बीएसएफ जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए हर जरूरी मदद मुहैया कराएगी.
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एएसएच/पीएम


