
New Delhi, 9 अक्टूबर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की उत्तरी कमान ने अहम भूमिका निभाई थी. उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा के अनुसार, अभियान के दौरान निशाना बनाए जाने के लिए चिह्नित नौ ठिकानों में से सात को नष्ट करने की जिम्मेदारी उत्तरी कमान को मिली थी, जिसे सेना ने पूरा किया.
उत्तरी कमान पूर्वी लद्दाख से सियाचिन तक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही है. भारतीय सेना की उत्तरी कमान हर समय किसी न किसी सैन्य अभियान में जुटी रहती है. चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा से लेकर सियाचिन ग्लेशियर और नियंत्रण रेखा तक, इस कमान की जिम्मेदारियां बेहद व्यापक हैं.
लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने यह जानकारी रक्षा त्रिवेणी संगम से मिले अनुभवों और उत्तरी कमान की सैन्य तैयारियों पर चर्चा करते हुए दी. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जमीनी हालात, पूर्वी लद्दाख में चीन से लगी सीमा पर तैनाती और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के बारे में विस्तार से बताया.
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के 88 घंटों के दौरान उत्तरी कमान ने अपनी परिचालन जिम्मेदारी निभाते हुए नौ में से सात चिह्नित ठिकानों को नष्ट किया. इस दौरान हवाई कार्रवाई और मिसाइल हमलों के साथ जमीन पर तैनात सैनिक लगातार सक्रिय रहे.
उन्होंने कहा कि इसी अवधि में सीमा पर गोलीबारी और संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाएं भी हुईं. गोलीबारी की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन 88 घंटों के दौरान करीब 12 हजार गोलियां चलीं. उत्तरी कमान को केवल किसी एक मोर्चे पर ध्यान नहीं देना होता. उसे एक साथ कई संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्य तैयारियां बनाए रखनी पड़ती हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव ने भी इन जिम्मेदारियों के बीच बेहतर तालमेल, सटीक कार्रवाई और मजबूत सैन्य क्षमताओं की जरूरत को रेखांकित किया. उत्तरी कमान की परिचालन जिम्मेदारियों का दायरा काफी विस्तृत है. लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा के अनुसार, यह कमान पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ लगी करीब 832 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की निगरानी करती है.
इसके अलावा, सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र में लगभग 121.5 किलोमीटर लंबी वास्तविक ग्राउंड पोजिशन लाइन और करीब 772 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा की जिम्मेदारी भी इसी के पास है. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के भीतरी क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए जाते हैं. इनमें श्रीनगर घाटी, जम्मू, राजौरी और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि इन तीनों प्रमुख परिचालन जिम्मेदारियों का एक साथ निर्वहन करना कमान के अधिकारियों, सैन्य नेतृत्व और जवानों के लिए बड़ी चुनौती है. इसलिए भविष्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर लगातार काम किया जा रहा है.
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने कहा कि उत्तरी कमान के सामने यह स्पष्ट चुनौती है कि भविष्य में संघर्ष उसके जिम्मेदारी वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में शुरू हो सकता है. ऐसी स्थिति में सेना को तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा. संघर्ष का दायरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए भी तैयारियां जरूरी हैं.
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जीसीबी/एएस