
New Delhi, 19 सितंबर . भारतीय रेलवे ने Saturday को रेल सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश में कवच संस्करण 4.0 के विस्तार को मंजूरी दे दी है. रेलवे ने बताया कि पूर्वोत्तर रेलवे के Lucknow डिवीजन में 607.7 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 लागू करने की परियोजना को 252 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृति प्रदान की गई है.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना स्वदेशी तकनीक-आधारित रेल सुरक्षा प्रणाली के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इसके तहत Lucknow डिवीजन के चिन्हित शेष रेल खंडों पर कवच 4.0 की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा ढांचे को और मजबूती मिलेगी.
कवच भारतीय रेल द्वारा विकसित एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) प्रणाली है, जिसका उद्देश्य ट्रेन संचालन की सुरक्षा को बढ़ाना और मानवीय त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है.
यह प्रणाली सिग्नल पास्ड एट डेंजर (एसपीएडी) जैसी घटनाओं को रोकने में मदद करती है. जरूरत पड़ने पर यह स्वतः ब्रेक लगा सकती है और ट्रेनों की गतिविधियों की निगरानी करते हुए सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करती है.
रेलवे के अनुसार, यह पहल पूरे रेल नेटवर्क में कवच प्रणाली के विस्तार की चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका मकसद ट्रेन सुरक्षा प्रणालियों का आधुनिकीकरण करना और रेलवे परिचालन की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता को बढ़ाना है.
इसी के साथ भारतीय रेल ने मध्य रेलवे के सोलापुर मंडल के सात स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली लगाने की परियोजना को भी मंजूरी दी है. इस परियोजना की लागत 209 करोड़ रुपए होगी.
रेलवे ने कहा कि यह आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली सोलापुर मंडल में सिग्नलिंग ढांचे को मजबूत करेगी और कवच जैसी स्वदेशी सुरक्षा प्रणालियों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद करेगी.
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक आधुनिक कंप्यूटर-आधारित सिग्नलिंग प्रणाली है, जो पारंपरिक रिले-आधारित इंटरलॉकिंग का स्थान लेती है. इससे प्वाइंट्स और सिग्नलों का संचालन अधिक भरोसेमंद बनता है, खराबी का पता लगाने और उसे ठीक करने में कम समय लगता है तथा रखरखाव भी आसान होता है.
स्वीकृत परियोजना के तहत मोहोल, मुंधेवाड़ी, बाले, सोलापुर, होटगी जंक्शन-होटगी ए केबिन, शाहाबाद और वाडी जंक्शन स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी. ये स्टेशन हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन-7) मार्ग पर स्थित हैं, जहां पहले ही कवच, ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) और सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल (सीटीसी) परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है.
बयान में आगे कहा गया है कि यह परियोजना उच्च घनत्व वाले रेल मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाने, सिग्नलिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण और परिचालन दक्षता में सुधार लाने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों का हिस्सा है. इससे रेल संचालन अधिक सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय बनने की उम्मीद है.
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डीबीपी