
चेन्नई, 15 सितंबर . डीएमके ने Tuesday को टीवीके पर कड़ा हमला करते हुए तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी पर ‘भाजपा के गुलाम’ की तरह काम करने का आरोप लगाया. यह आरोप तब लगाया गया जब Chief Minister सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित ‘अपमानजनक टिप्पणी’ करने के लिए Lok Sabha सांसद ए. राजा और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री पी.के. सेकर बाबू के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए.
इससे पहले डीएमके सांसद राजा ने अपनी टिप्पणियों पर हुए विरोध के बाद उन्हें वापस ले लिया था.
डीएमके के प्रवक्ता टी.के.एस. इलांगोवन ने से बात करते हुए कहा, “राजनीति में लोग दूसरों की आलोचना करते हैं. वे इस आलोचना के खिलाफ केस दर्ज कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “जब हमारे विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु में हुए अपराधों का जिक्र किया और पूछा कि Chief Minister ने अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है तो कोई जवाब नहीं मिला. जवाब देते समय भी उन्होंने (सीएम विजय) इस बात का जिक्र नहीं किया, इसलिए उनका मकसद अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं है. उनका मकसद सिर्फ Political नेताओं, खासकर डीएमके नेताओं को गिरफ्तार करना है, क्योंकि उनके ‘बॉस’ ने उन्हें डीएमके के खिलाफ बोलने और उसके खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया है, इसीलिए उन्होंने हमारे विपक्ष के नेता को भी गिरफ्तार किया था.”
इलांगोवन, महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में 4 अगस्त को उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी का जिक्र कर रहे थे. बाद में उसी दिन उन्हें रिहा कर दिया गया.
इसके अलावा, डीएमके प्रवक्ता ने कहा, “यह टीवीके है. वे भाजपा के गुलाम हैं, क्योंकि भाजपा डीएमके-विरोधी है, इसलिए वे (टीवीके) वही करना चाहते हैं जो भाजपा कहती है.”
इससे पहले, विपक्षी पार्टी द्वारा सीएम विजय और कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार पर डीएमके नेताओं और आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों के बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाने के बाद विवाद खड़ा हो गया था.
वरिष्ठ डीएमके नेताओं पी.के. सेकर बाबू और आर.एस. भारती ने तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान Chief Minister की कड़ी आलोचना की.
हालांकि, सीएम विजय और निर्मल कुमार पर निशाना साधने वाली राजा की टिप्पणियों ने एक नया Political विवाद खड़ा कर दिया और Government के खिलाफ डीएमके के आरोपों से ध्यान हटा दिया.
कई टीवीके पदाधिकारियों और मंत्रियों ने सांसद की टिप्पणियों की निंदा की और उन्हें व्यक्तिगत, अपमानजनक और एक वरिष्ठ सांसद के लिए अशोभनीय बताया.
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एससीएच/डीकेपी