
चंडीगढ़, 5 सितंबर . भ्रष्टाचार के आरोपों और सीबीआई जांच की मांग के बीच शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने Chief Minister भगवंत मान के आवास की ओर हजारों महिलाओं के विरोध मार्च का नेतृत्व किया, जिसके चलते Police ने उन्हें और अन्य एसएडी नेताओं को हिरासत में ले लिया.
सांसद हरसिमरत कौर बादल ने Saturday को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीएम भगवंत मान ने शर्म की सारी हदें पार कर दी हैं. जिन लोगों को सलाखों के पीछे भेजना था, उन्हें Governmentी खर्चे पर विदेश भेज दिया गया. जिन लोगों को जेल नहीं भेजना चाहिए था, उन्हें जेल भेज दिया. उन्हें नशीला पदार्थ दिया गया. अंदर से पीड़ितों को धमकाया गया. आज जब हम गुरुप्रीत कौर के खिलाफ धरना दे रहे हैं, तो हमें सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है. मैं पंजाब के लोगों को यही कहूंगी कि इन लोगों को पहचानिए. आज की तारीख में सीएम का आवास भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है. रेप के आरोपी को Governmentी पैसे पर विदेश तक भेज दिया गया. एक आरोपी पर जिस पर कई लड़कियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं. आज तक Government की ओर से इस पूरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई. Government ने पूरी तरह से खामोशी अख्तियार कर रखी है.
उन्होंने कहा कि आखिर Chief Minister जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं. इसे लेकर पूरी तस्वीर साफ होनी चाहिए. सबसे पहले हमारा यही कहना है कि सीएम गिल्टी है. Chief Minister का पूरा आवास भ्रष्टाचार में लिप्त है. बेटी खुद सामने आकर कह रही है कि रेप के आरोपी को सीएम की पत्नी ने विदेश भेज दिया, ताकि उसे बचाया जा सके.
हरसिमरत कौर बादल के मुताबिक यह दुर्भाग्य की बात है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के शासनकाल में रेप के आरोपियों का सत्कार किया जा रहा है. अब वो दिन दूर नहीं है, जब पंजाब की बेटियां आम आदमी पार्टी के नेताओं को सल्फास की गोलियां देंगी, क्योंकि इन लोगों ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं. पीड़िता ने भी जज साहब को अपना बयान दर्ज करवा दिया है. इतना सब कुछ होने के बावजूद भी रेप का आरोपी कैसे बाहर निकला और इससे भी ज्यादा हैरानी की बात है कि आखिर वो विदेश कैसे पहुंचा? इसे लेकर पूरी तस्वीर साफ होनी चाहिए. क्या यह सब कुछ Policeकर्मियों की रजामंदी के बिना मुमकिन था. अब पंजाब में इतना सब कुछ होने के बाद भगवंत मान को सीएम की कुर्सी पर रहने का कोई हक नहीं है. सीएम को तत्काल अपनी कुर्सी छोड़नी चाहिए. हमारी यही मांग है. हम हाईकोर्ट से कहेंगे कि इस पूरे मामले का स्वत: संज्ञान लिया जाना चाहिए.
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एसएचके/वीसी