ब्लू इकोनॉमी को सुरक्षा कवच दे रही पीएम-एमकेएसएसवाई, मत्स्य किसानों के लिए बीमा बना बड़ा सहारा

New Delhi, 28 सितंबर . India का मत्स्य क्षेत्र पिछले एक दशक में तेजी से विकसित हुआ है और देश की ब्लू इकोनॉमी का महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है. Government द्वारा Monday को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, देश का कुल मछली उत्पादन वर्ष 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 19.8 मिलियन टन तक पहुंच गया है. इसी दौरान अंतर्देशीय (इनलैंड) मत्स्य उत्पादन 6.1 मिलियन टन से बढ़कर 14.74 मिलियन टन हो गया, जो इस क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है.

Government का कहना है कि उत्पादन में इस तेज वृद्धि को सुरक्षित बनाए रखने और मत्स्य किसानों को रोगों, बाढ़ तथा जलवायु संबंधी जोखिमों से बचाने के लिए वर्ष 2024 में शुरू की गई Prime Minister मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत बीमा पहल एक महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र के रूप में उभर रही है.

इस योजना के तहत लाभों का वितरण नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए सहायता राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंचती है.

फिलहाल चार Governmentी बीमा कंपनियां ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (ओआईसीएल), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एआईसीएल), न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईएएल) और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (यूआईआईसी) इस योजना में शामिल हैं. ये कंपनियां झींगा, प्रॉन, ताजे पानी की मछलियों और ठंडे पानी की प्रजातियों के लिए बीमा कवरेज उपलब्ध करा रही हैं. Government निजी बीमा कंपनियों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया में है.

फैक्टशीट के अनुसार, योजना का प्रमुख उद्देश्य जलीय कृषि बीमा को किसानों के लिए किफायती बनाना है, जिसके तहत किसानों को एक फसल चक्र के लिए खरीदी गई बीमा पॉलिसी पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.

पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत पात्र लाभार्थियों को बीमा प्रीमियम का 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाता है. तालाब-आधारित जलीय कृषि में यह सहायता 25,000 रुपए प्रति हेक्टेयर तक सीमित है, जबकि अधिकतम चार हेक्टेयर क्षेत्र तक 1 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध है. एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र वाले किसानों को भी अनुपातिक आधार पर लाभ दिया जाता है.

योजना के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं. अब तक 316 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो 730.61 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हैं. इनमें से 127 आवेदनों को मंजूरी देकर सहायता राशि वितरित की जा चुकी है, जिससे 321.74 हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य पालन करने वाले किसानों को लाभ मिला है और कुल 40.03 लाख रुपए का भुगतान किया गया है.

Government ने आधुनिक जलीय कृषि प्रणालियों को भी योजना में शामिल किया है. केज कल्चर, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), बायोफ्लॉक, रेसवे और अन्य उन्नत तकनीकों के लिए भी बीमा प्रीमियम पर 40 प्रतिशत सहायता दी जाती है. इस श्रेणी में अधिकतम सहायता 1 लाख रुपए है और पात्र इकाई का आकार 1,800 घन मीटर तक निर्धारित किया गया है.

इसके अलावा, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी की तुलना में अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है.

फैक्टशीट के अनुसार, यदि बीमा से कवर किसी जोखिम की घटना होती है, तो किसान को तुरंत बीमा कंपनी को सूचित करना होता है. इसके बाद आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाते हैं और बीमा कंपनी नुकसान का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ नियुक्त करती है. आकलन रिपोर्ट के आधार पर दावा निपटाया जाता है और भुगतान किया जाता है. पूरी प्रक्रिया के दौरान बीमा कंपनी अपने पोर्टल के माध्यम से नियमित स्थिति अपडेट भी उपलब्ध कराती है.

इसमें आगे कहा गया है कि दावा निपटान की समय सीमा भी तय की गई है. झींगा पालन से संबंधित मामलों में दावे का निपटारा 30 दिनों के भीतर किया जाना है, जबकि अन्य जलीय कृषि गतिविधियों के लिए यह अवधि 45 दिन निर्धारित की गई है.

Government का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल बीमा प्रीमियम पर सब्सिडी देना नहीं, बल्कि देश में जलीय कृषि बीमा का एक मजबूत और आत्मनिर्भर बाजार विकसित करना है. इसके लिए केंद्र Government, राज्य Governmentों, बीमा कंपनियों, किसानों और तकनीकी संस्थानों को मिलकर काम करना होगा.

फैक्टशीट के अनुसार, पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत की जा रही पहलें भविष्य में India के मत्स्य क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ देश की ब्लू इकोनॉमी को भी नई मजबूती देंगी.

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डीबीपी

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