बिहार : भोजपुर में मादा कुत्ते के यौन शोषण के आरोप में एफआईआर, जांच में जुटी पुलिस

आरा, 12 अक्टूबर . बिहार के भोजपुर जिले के बिछिआंव गांव में मादा कुत्ते के साथ कथित यौन शोषण के मामले में Police ने First Information Report दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पशु अधिकार संगठन पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया के हस्तक्षेप और स्थानीय देखभालकर्ता की शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई.

उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. संदेश थाना Police के अनुसार, स्थानीय देखभालकर्ता मुकेश कुमार की शिकायत और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर एक आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 62 और 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 (1) (ए) और 11 (1) (i) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.

Police मामले की जांच कर रही है.

Police के मुताबिक, घटना के बाद Governmentी पशु चिकित्सक ने मादा कुत्ते की पशु चिकित्सकीय जांच भी की है. फिलहाल कुत्ता स्थानीय देखभालकर्ता की देखरेख में है. संदेश थाना प्रभारी संजीव कुमार ने Monday को बताया कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

पेटा इंडिया की क्रूरता प्रतिक्रिया टीम की एसोसिएट मैनेजर सलोनी सकरिया ने First Information Report दर्ज करने के लिए संदेश थाना प्रभारी की सराहना की. उन्होंने कहा कि पशुओं के खिलाफ क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें कानून के तहत अधिकतम सुरक्षा मिलनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि पशुओं के प्रति क्रूरता और इंसानों के खिलाफ हिंसा के बीच संबंध होने की बात कई अध्ययनों में सामने आई है. पेटा इंडिया ने केंद्र Government से भारतीय न्याय संहिता में संशोधन कर पशुओं के साथ यौन शोषण को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध बनाने की मांग की है.

संगठन के अनुसार, भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत पशुओं के साथ यौन हिंसा दंडनीय थी, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में ऐसा स्पष्ट प्रावधान नहीं है. संगठन ने विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि पशुओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले अक्सर दर्ज नहीं हो पाते हैं.

पेटा इंडिया का कहना है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों में अन्य हिंसक अपराधों में शामिल होने की आशंका भी अधिक हो सकती है.

पेटा इंडिया ने कहा कि पशुओं के खिलाफ क्रूरता और यौन हिंसा रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान और प्रभावी Police कार्रवाई जरूरी है. संगठन के मुताबिक, पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज में हिंसा के खिलाफ संवेदनशीलता बढ़ाने और कानून के प्रति सम्मान मजबूत करने में भी मदद कर सकता है.

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एमएनपी/एमएस

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