
Patna, 17 सितंबर . बिहार Police ने बच्चों को सुरक्षित और बाल-मित्र वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य के प्रत्येक थाने में चाइल्ड हेल्प डेस्क और चाइल्ड कॉर्नर स्थापित करने का निर्णय लिया है. यह पहल कमजोर वर्ग, अपराध अनुसंधान विभाग की ओर से बिहार Police अधिनियम, 2007 की धारा 8(5) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जा रही है.
बिहार Police मुख्यालय की ओर से Thursday को जारी सूचना के अनुसार, प्रत्येक थाना परिसर में चाइल्ड हेल्प डेस्क, चाइल्ड कॉर्नर को ऐसे स्थान पर स्थापित किया जाएगा, जो बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए आसानी से दिखाई देने वाला और सुगम हो. इस केंद्र को थाना परिसर के लॉकअप से पूरी तरह अलग रखा जाएगा. इसका संचालन थाना के बाल कल्याण Police पदाधिकारी के नेतृत्व में किया जाएगा.
चाइल्ड हेल्प डेस्क पर संबंधित बाल कल्याण Police पदाधिकारी का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाएगा. इसके साथ ही संबंधित जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर भी वहां उपलब्ध कराया जाएगा. Police मुख्यालय ने निर्देश दिया है कि प्रदर्शित किए जाने वाले संपर्क नंबर हमेशा सक्रिय रहें, ताकि बच्चे और उनके अभिभावक आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें. बालिकाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान और उनके साथ संवाद के लिए योग्य महिला Policeकर्मियों की भी प्रतिनियुक्ति की जाएगी.
Police के अनुसार, बच्चों और अभिभावकों से प्राप्त शिकायतों अथवा सहायता के अनुरोधों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी. शिकायतों के समयबद्ध निष्पादन के साथ उनका समुचित अभिलेख भी रखा जाएगा. Police मुख्यालय ने चाइल्ड हेल्प डेस्क/चाइल्ड कॉर्नर के कामकाज की नियमित निगरानी की व्यवस्था भी की है. Police उपाधीक्षक, विशेष अपराध-सह प्रभारी विशेष किशोर Police इकाई तथा अन्य वरीय जिला Police पदाधिकारी इन केंद्रों के कार्यों का पर्यवेक्षण करेंगे. इसका उद्देश्य बच्चों से संबंधित मामलों में संवेदनशील और प्रभावी Policeिंग सुनिश्चित करना है.
बिहार Police के अनुसार, राज्य के प्रत्येक थाने में चाइल्ड हेल्प डेस्क/चाइल्ड कॉर्नर स्थापित करने की समयसीमा 2 अक्टूबर, गांधी जयंती निर्धारित की गई है. सभी संबंधित जिलों को इसके अनुपालन की रिपोर्ट 5 अक्टूबर तक कमजोर वर्ग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
बताया गया कि इस पहल के तहत प्रत्येक थाने में बच्चों के लिए अलग और सुरक्षित सहायता केंद्र, लॉकअप से पृथक बाल-मित्र वातावरण, बाल कल्याण Police पदाधिकारी और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी के संपर्क नंबर का प्रदर्शन, बालिकाओं के लिए महिला Policeकर्मियों की उपलब्धता, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई तथा नियमित पर्यवेक्षण और अभिलेख संधारण सुनिश्चित किया जाएगा.
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एमएनपी/डीकेपी