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Sunday, 8 November 2026
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बांग्लादेश में सत्ता बदलने के बाद भी नहीं थम रही राजनीतिक हिंसा, रिपोर्ट में सामने आई चिंताजनक तस्वीर

बांग्लादेश में सत्ता बदलने के बाद भी नहीं थम रही Political हिंसा, रिपोर्ट में सामने आई चिंताजनक तस्वीर

New Delhi, 8 नवंबर . बांग्लादेश में Political नेतृत्व बदलने के बाद भी Political हिंसा की घटनाएं जारी हैं. हाल के दिनों में सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के समर्थकों की हत्याओं ने दिखाया है कि स्थानीय प्रभाव, Political पदों और संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर पुरानी प्रतिद्वंद्विता अब भी बनी हुई है.

‘द डिप्लोमैट’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने पिछले दो दशकों से ज्यादा समय के दौरान हुई Political हिंसा के पैटर्न का अध्ययन किया है. इसके लिए बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठन ‘ऐन ओ सालिश केंद्र’ (एएसके) के रिकॉर्ड, अकादमिक रिसर्च और मीडिया रिपोर्टों का इस्तेमाल किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, बड़े Political बदलावों के दौर में भी विभिन्न Governmentों के दौरान Political झड़पें लगातार होती रही हैं.

हाल की एक घटना 18 अक्टूबर को हुई, जब नारायणगंज जिले के पैस्का इलाके में बीएनपी की युवा शाखा ‘जुबो दल’ के स्थानीय नेता रिपन मियां का पीछा कर उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया. परिवार वाले उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

स्थानीय बीएनपी कार्यकर्ताओं के मुताबिक, एक धार्मिक कार्यक्रम की मेहमान सूची में किसका नाम शामिल किया जाए, इसी बात को लेकर दो गुटों के बीच तनाव बढ़ गया था. रिपन की बेटी शीला ने स्थानीय मीडिया को बताया कि कई लोगों ने उनके पिता का पीछा किया और उन पर हमला किया. स्थानीय बीएनपी अध्यक्ष ने इस हत्या को Political दबदबे की लड़ाई से जुड़ा बताया.

एक अन्य घटना 28 फरवरी को चुआडांगा जिले में हुई, जहां बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी (जेआई) समर्थकों के बीच झड़प में दो भाइयों की मौत हो गई.

Police के अनुसार, रमजान के दौरान इफ्तार के बाद शुरू हुई बहस हिंसक संघर्ष में बदल गई.

इस घटना में हाफिजुर रहमान की कुछ घंटों बाद मौत हो गई, जबकि उनके भाई मोफिजुर रहमान, जो स्थानीय जेआई नेता थे, ने 10 मार्च को ढाका के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया.

दोनों पार्टियों ने इस घटना के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया. परिवार की ओर से दर्ज हत्या के मामले के बाद Police ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक स्थानीय बीएनपी नेता और उसकी स्वयंसेवी शाखा का एक पूर्व पदाधिकारी शामिल था. यह घटना बीएनपी के सत्ता में लौटने के दो सप्ताह से भी कम समय बाद हुई थी.

रिपोर्ट में दिए गए एएसके के आंकड़े समस्या की गंभीरता को दिखाते हैं. जनवरी से सितंबर 2026 के बीच संगठन ने Political हिंसा की 467 घटनाएं दर्ज कीं, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई और 3,587 लोग घायल हुए. इनमें से 112 घटनाएं बीएनपी के अंदरूनी गुटों के बीच संघर्ष की थीं, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 1,215 लोग घायल हुए.

ये आंकड़े अंतरिम प्रशासन और बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान के नेतृत्व वाली निर्वाचित Government दोनों के कार्यकाल को शामिल करते हैं. तारिक रहमान ने 17 फरवरी को Prime Minister पद संभाला था.

रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई नई बात नहीं है. 2002 से 2006 के बीच, जब बीएनपी पहले सत्ता में थी, तब एएसके ने पार्टी के भीतर 284 अंदरूनी झड़पें दर्ज की थीं, जिनमें 55 लोगों की मौत हुई थी. उसी अवधि में अवामी लीग (एएल) के भीतर हुए संघर्षों में 37 लोगों की जान गई थी.

जब 2009 में अवामी लीग दोबारा सत्ता में आई, तब 2009 से 2012 के बीच एएसके ने पार्टी के भीतर 799 अंदरूनी संघर्ष दर्ज किए, जिनमें 97 लोगों की मौत हुई. उसी दौरान बीएनपी में 229 झड़पें हुईं और 21 लोगों की मौत हुई.

रिपोर्ट में स्थानीय चुनावों, खासकर यूनियन परिषद चुनावों के दौरान होने वाली हिंसा पर भी प्रकाश डाला गया है. एएसके के अनुसार, चुनावी हिंसा से जुड़ी घटनाओं में 2016 में 147 लोगों और 2021 में 113 लोगों की मौत हुई थी. इससे पता चलता है कि स्थानीय Political पदों के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा कई बार जानलेवा रूप ले लेती है.

रिपोर्ट के अनुसार, Political संगठनों के भीतर वर्चस्व की लड़ाई, साथ ही ठेकों, जमीन, संपत्ति और रोजगार से जुड़े विवाद, हिंसा के प्रमुख कारण हैं.

अगस्त 2024 में हुए Political बदलाव, जिसने Prime Minister शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन का अंत किया, से लोगों को उम्मीद थी कि देश में नई Political संस्कृति विकसित होगी. लेकिन बाद की घटनाओं से संकेत मिला कि स्थानीय प्रभाव और आर्थिक नेटवर्क पर नियंत्रण की लड़ाई अंतरिम Government और बीएनपी के सत्ता में लौटने के बाद भी जारी रही.

रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन जरूर होते रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर चलने वाली Political प्रतिद्वंद्विता खत्म नहीं हुई है. यही वजह है कि Political हिंसा बार-बार सामने आती रहती है और देश के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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एवाई/एबीएम

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