बच्चों के अपहरण पर सख्त कानून की मांग, Supreme Court ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

New Delhi, 10 सितंबर . देश में बच्चों के बढ़ते अपहरण को लेकर Supreme Court में एक जनहित याचिका दायर की गई है. इस याचिका में कानून को और सख्त करने की मांग की गई. याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court ने केंद्र और सभी राज्य Governmentों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की है.

याचिका में कहा गया है कि देश में गैर-कानूनी गोद लेने का संगठित रैकेट चल रहा है. इंटरस्टेट चाइल्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क सक्रिय है. शोषण और ‘बॉडी पार्ट’ की ट्रेडिंग के लिए बच्चों का अपहरण किया जा रहा है. यहां तक कि मेडिकल ट्रायल के लिए भी बड़े पैमाने पर बच्चों की किडनैपिंग हो रही है.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि Police लापता, किडनैप और अगवा हुए बच्चों के मामलों में तुरंत First Information Report दर्ज नहीं करती और तेजी से जांच भी नहीं करती. देर से जांच और लंबे ट्रायल की वजह से संगठित किडनैपिंग माफिया को अपना गैर-कानूनी धंधा बढ़ाने में मदद मिलती है.

याचिका में की बड़ी मांगें की गई हैं, जिसमें बच्चों के अपहरण की जांच Police के एसीपी या एसएचओ स्तर के अधिकारियों को करने, अपहरण के मामलों को 1 साल के भीतर निपटाने के लिए एमएलए-एमपी कोर्ट की तर्ज पर स्पेशल कोर्ट का गठन करने और अपहरणकर्ताओं के परिवार के सदस्यों की संपत्ति जब्त करने जैसी बातें शामिल हैं.

याचिका में कई चौंकाने वाले आंकड़े भी दिए गए हैं. 1 जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक साल 2013 से बिहार में हर साल लगभग 15,000 मिसिंग केस दर्ज होते हैं, जिनमें से ज्यादातर बच्चे होते हैं और मुश्किल से 50 प्रतिशत बच्चे ही मिल पाते हैं.

एनसीआरबी के डेटा का हवाला देते हुए बताया गया है कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग के सबसे ज्यादा केस Odisha, बिहार, तेलंगाना और Maharashtra में दर्ज हुए हैं. नाबालिग लड़कों की ट्रैफिकिंग के सबसे ज्यादा केस Odisha में हैं, उसके बाद बिहार का नंबर आता है. वहीं नाबालिग लड़कियों की ट्रैफिकिंग में Rajasthan में सबसे ज्यादा केस दर्ज हुए हैं. इन बच्चों को भीख मंगवाने, बाल मजदूरी, वेश्यावृत्ति और दूसरे गैर-कानूनी कामों में धकेला जाता है.

याचिका में 5 जून 2026 की एक घटना का भी जिक्र है, जब दिल्ली Police ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया था. Police के मुताबिक यह नेटवर्क 5 राज्यों – दिल्ली, Haryana, Rajasthan , Madhya Pradesh और Gujarat में काम कर रहा था. यह गिरोह ईडब्ल्यूएस और बीपीएल परिवारों से नवजात बच्चों को किडनैप करके उन्हें गैर-कानूनी कामों के लिए 8 से 10 लाख रुपए में बेच रहा था.

वीकेयू/पीएम

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