
New Delhi, 27 अगस्त . Prime Minister स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के पुनर्गठित स्वरूप ने Thursday को एक वर्ष पूरा कर लिया है. केंद्र Government ने 27 अगस्त 2025 को इस योजना के विस्तारित और पुनर्गठित संस्करण को मंजूरी दी थी, जिसके तहत ऋण वितरण अवधि को 31 मार्च 2030 तक बढ़ाया गया.
Government ने बताया कि पुनर्गठन के बाद पहले एक वर्ष में योजना के तहत 21.86 लाख ऋण वितरित किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य 6,294 करोड़ रुपए है. इस दौरान 10.56 लाख नए लाभार्थी योजना से जुड़े हैं. Government का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ ऋण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है.
Thursday को आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस योजना का लक्ष्य देशभर के 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को औपचारिक ऋण, डिजिटल वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ना है. इसके अंतर्गत लगभग 50 लाख नए लाभार्थियों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.
बयान के अनुसार, औपचारिक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच आसान बनाने के लिए Government ने पात्र लाभार्थियों के लिए यूपीआई से लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा शुरू की है, जिसके माध्यम से विक्रेताओं को 30,000 रुपए तक की क्रेडिट सीमा उपलब्ध कराई जा रही है.
अब तक 27,077 क्रेडिट कार्डों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिससे छोटे व्यापारियों को नकदी की तत्काल आवश्यकता पूरी करने और डिजिटल भुगतान अपनाने में मदद मिल रही है.
योजना के तहत शुरू किए गए एंड-टू-एंड डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म (डीएलपी) ने आवेदन से लेकर सत्यापन, मंजूरी और ऋण वितरण तक की पूरी प्रक्रिया को सरल बना दिया है.
इसके साथ ही Government ने वेंडर माइग्रेशन मॉड्यूल भी विकसित किया है, जिसके जरिए यदि कोई विक्रेता एक शहरी निकाय क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित होता है, तो उसकी अनुशंसा पत्र और योजना के लाभ बिना किसी बाधा के जारी रह सकते हैं.
बयान में आगे कहा गया है कि पुनर्गठित योजना के तहत सिटी रीजन एप्रोच को अपनाया गया है, जिसके माध्यम से अब जनगणना नगरों को भी योजना में शामिल किया जा रहा है. इससे अधिक संख्या में रेहड़ी-पटरी विक्रेता औपचारिक ऋण और आजीविका सहायता तंत्र से जुड़ सकेंगे.
Government के अनुसार पीएम स्वनिधि अब केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उद्यमिता और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला व्यापक कार्यक्रम बन चुकी है.
इसके तहत चल रहे पीएम स्वनिधि स्टार्टअप चैलेंज में स्टार्टअप्स और नवप्रवर्तकों को बाजार पहुंच, डिजिटल भुगतान, वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और वेंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के व्यवसाय और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए Government ने देशभर में 50 स्ट्रीट फूड हब (एसएफएच) विकसित करने की योजना बनाई है.
प्रत्येक हब के लिए शहरों को 4 करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी. इसके अतिरिक्त वेंडिंग जोन अधिसूचित करने के लिए 25 लाख रुपए की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी.
इसके साथ ही मंत्रालय ने बयान में बताया कि योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए देशभर में लोक कल्याण मेले आयोजित किए जा रहे हैं, जहां रेहड़ी-पटरी विक्रेता, बैंक और शहरी स्थानीय निकाय एक मंच पर आते हैं.
Government ने घोषणा की है कि लोक कल्याण मेलों का अगला चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा. इन मेलों के माध्यम से लाभार्थियों को ऋण, सामाजिक कल्याण योजनाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
योजना की शुरुआत जून 2020 में की गई थी. तब से अब तक 78.68 लाख रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 1.18 करोड़ से अधिक ऋण दिए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 19,171 करोड़ रुपए से अधिक है.
समय पर ऋण चुकाने को प्रोत्साहित करने के लिए Government अब तक 421 करोड़ रुपए की ब्याज सब्सिडी जारी कर चुकी है. वहीं, 57.09 लाख विक्रेताओं ने 908 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं.
योजना के तहत डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए अब तक 418.78 करोड़ रुपए की कैशबैक प्रोत्साहन राशि जारी की जा चुकी है. इसके अलावा स्वनिधि से समृद्धि पहल के तहत 51.15 लाख से अधिक लाभार्थी परिवारों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग की गई है.
Government के अनुसार, पात्र परिवारों को केंद्र Government की आठ प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के तहत 1.59 करोड़ से अधिक लाभ स्वीकृत किए गए हैं. इसके साथ ही, 6 लाख से अधिक स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को एफएसएसएआई के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी प्रशिक्षण भी दिया गया है.
Government का कहना है कि पीएम स्वनिधि अब एक साधारण ऋण योजना से आगे बढ़कर वित्तीय समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला व्यापक मिशन बन चुकी है. योजना के पुनर्गठित स्वरूप के पहले वर्ष की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि देश के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आत्मनिर्भर सूक्ष्म उद्यमी बनाने की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है, जो ‘विकसित India 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
–
डीबीपी