
New Delhi, 16 सितंबर . ‘फ्रेंड्स’- यह महज एक शब्द नहीं, बल्कि Prime Minister Narendra Modi की उस नई संवाद शैली का सूत्रपात था, जिसने हाल ही में ‘जेन-जी’ (युवा पीढ़ी) के रोष को लेकर बनाए गए विरोधियों के हर नैरेटिव को एक झटके में ध्वस्त कर दिया. यह बड़े-बड़े मंचों से निकलकर मोबाइल स्क्रीन तक पहुंचे बदलते दौर का बदला हुआ संवाद था. हालांकि, इस नए माध्यम में भी उनका अंदाज और परिणाम वही रहा, जिसके लिए वे जाने जाते हैं. एक ऐसा नेतृत्व जिसे Political रूप से पस्त करना लगभग असंभव रहा है. Gujarat से शुरू होकर दिल्ली के तख्त तक पहुंचा उनका अजेय Political सफर इस बात का गवाह है.
पीएम मोदी संकट प्रबंधन की ऐसी मिसाल हैं, जिसने सामने बड़े से बड़े धुरंधर अब तक विफल है. जब बीते दिनों पेपर लीक का शोर देश के कई कोनों में गूंज रहा था और यह संसद की चौखट तक पहुंच चुका था. युवाओं में भारी आक्रोश और विपक्ष की नई-नई रणनीतियां केंद्र पर दबाव बढ़ा रही थीं. उसी बीच, social media पर Prime Minister मोदी ने एक वीडियो संदेश क्या साझा किया, विरोधी पस्त हो गए. जो नाराजगी युवाओं में थी, उनको सीधे ‘फ्रेंड्स’ से संबोधित करके पीएम मोदी ने अपनी संवेदनशीलता और संप्रेषण का परिचय दिया.
यह सिर्फ मोबाइल स्क्रीन के जरिए पीएम मोदी का संवाद था. इसके बाद जब युवाओं के बीच Gujarat के एक कार्यक्रम में पीएम मोदी की एंट्री हुई थी तो युवाओं ने ‘जेन-जी’ अंदाज में उनका स्वागत किया था. ‘जेन-जी’ ने दिल खोलकर उनके लिए पोस्टर बनाए. दिलचस्प यह था कि पोस्टर पेन और पेपर से नहीं बनाए गए थे, बल्कि मोबाइल की स्क्रीन पर बनाए गए. नया स्टाइल, ट्रेडिंग गाने, क्रिएटिव पोस्टर और भव्य एंट्री यह कार्यक्रम में सब कुछ देखा गया.
‘सबका मंगल हो’, इसी सोच से Prime Minister Narendra Modi का ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम भी शुरू हुआ है. एक ऐसा मंच जहां संवाद भी हो और जुड़ाव भी. यह एक नई पहल है, जिसमें सांसद हर Tuesday को खुलकर बातचीत करने और नए आइडिया पर चर्चा करने के लिए मिलते हैं.
BJP MP मनोज तिवारी के अनुसार, Prime Minister मोदी ने ‘मंगल मिलन’ की शुरुआत इस विचार के साथ की कि देश के युवाओं, खासकर छात्रों से लगातार संवाद हो और उन्हें Government के प्रयासों से जोड़ा जाए.
पहले ही ‘मंगल मिलन’ में उन्होंने सांसदों को युवाओं से जुड़ने, छात्रों को जागरूक करने और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. ‘मंगल मिलन’ एक ऐसा मंच बना, जहां पीएम मोदी और सांसद खुलकर विचार साझा करते हैं और पीएम मोदी उन्हें जनता से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं.
बांसुरी स्वराज बताती हैं कि कैसे पीएम मोदी इन बैठकों का इस्तेमाल हर तरह के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए करते हैं. चुनौतियों से लेकर नए आइडिया तक, ‘मंगल मिलन’ वह जगह है जहां बातचीत असल काम में बदलती है.
यह एकमात्र उदाहरण नहीं हैं. मंचों से उनकी आवाज हमेशा भीड़ खींचने में और विरोधियों को परास्त करने में सफल रही. बीच भाषण में बिजली गुल हो जाना हर वक्ता का खराब अनुभव होता है, लेकिन Prime Minister मोदी के साथ जब ऐसा हुआ, तो उन्होंने इसे अपनी एक खासियत में बदल दिया.
उत्तराखंड के पूर्व विधायक मुकेश कोली ने ऐसी ही एक घटना का जिक्र ‘मोदी स्टोरी’ में किया था. उन्होंने बताया था कि 2007 में पौड़ी में बिजली की बड़ी समस्या के दौरान तत्कालीन Gujarat के Chief Minister Narendra Modi जब एक रैली को संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने इस स्थिति को कैसे संभाला. उन्होंने प्रोटोकॉल को दरकिनार किया, भीड़ को अपने करीब बुलाया और बिना माइक के पूरे 40 मिनट तक लोगों को संबोधित किया.
जनता के साथ Prime Minister का जुड़ाव जिस तरह का है, उसी तरह पार्टी के अंदर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ है. पीएम मोदी अक्सर अपने व्यवहार से यह सिद्ध करते हैं कि भाजपा सचमुच कार्यकर्ताओं की पार्टी है. राष्ट्रीय अध्यक्ष हों या बूथ स्तर के कार्यकर्ता, पीएम मोदी हर कार्यकर्ता के साथ पूरी मजबूती से खड़े रहते हैं.
भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी पीएम मोदी से जुड़े एक प्रेरणादायक प्रसंग के बारे में बताया. नितिन नवीन ने एक किस्सा बताते हुए कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बिहार में हुई थी. उस समय Patna में एक बड़ी रैली का आयोजन हुआ था. भाजपा के सभी बड़े नेता आ रहे थे. हम सभी वहां प्रोटोकॉल के तहत स्वागत करने के लिए मौजूद थे. सभी नेता आ रहे थे और वे अपनी-अपनी गाड़ियों में बैठकर निकल रहे थे.
नितिन नवीन ने बताया कि जब पीएम मोदी आए तो हम उनका स्वागत किया. उस समय उन्होंने सवाल किया कि बाहर बहुत सारे कार्यकर्ता खड़े होंगे. हम लोगों ने बताया कि हां कार्यकर्ता मौजूद हैं. तब उन्होंने बोला कि उन कार्यकर्ताओं से मिलते हुए चलेंगे. पीएम मोदी पैदल हम लोगों के साथ बाहर आए और सभी कार्यकर्ताओं की माला को अपने हाथों में लिया. उन्होंने सबका अभिवादन किया और उन्हें प्रणाम किया. इसके बाद वे अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से रवाना हुए थे. यह स्मरण भले छोटा हो, लेकिन अपने कार्यकर्ताओं के लिए सम्मान के भाव को दर्शाता है.
Prime Minister Narendra Modi, एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अक्सर खुद को पीछे रखा और अपनी टीम को आगे आने, नेतृत्व करने और नई चीजें करने का मौका दिया.
एक पूर्व नौकरशाह ने Gujarat के Chief Minister के तौर पर Narendra Modi से जुड़ा एक किस्सा बताया. ‘मोदी स्टोरी’ में उन्होंने कहा कि ‘चिंतन शिविर’ की शुरुआत में, हम सभी (मंत्री, सचिव, कलेक्टर) वहां मौजूद होते थे. मोदी जी असल में पीछे बैठते थे. वे हर बात को ध्यान से सुनते और चर्चा में हिस्सा भी लेते थे. यह बहुत अहम बात है. ऐसा कभी नहीं होता था कि कोई इसमें शामिल न हो रहा हो. बात सिर्फ इतनी नहीं थी कि वे दूसरों को हिस्सा लेने या वक्ता से सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करते थे, बल्कि कई सवाल तो खुद उनकी तरफ से ही आते थे.
पूर्व नौकरशाह बताते हैं कि कई बार बातचीत की शुरुआत भी वे ही करते थे. मेरा मतलब है कि वे वहां साफतौर पर एक प्रतिभागी की तरह काम करते थे. वहां कभी भी ‘चीफ एग्जीक्यूटिव’ या ऐसी किसी भूमिका का भाव नहीं होता था. इसीलिए मैं आपको बता रहा हूं कि वे जान-बूझकर पीछे बैठते थे. वे असल में आगे नहीं बैठते थे. वे चीजों को देखते-समझते थे और चर्चा में हिस्सा भी लेते थे.
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डीसीएच/एएस