
इस्लामाबाद, 21 सितंबर . Pakistan तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की ओर से 27 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन एक बार फिर Pakistan की उस गहरी Political कमजोरी को सामने ला सकता है, जिसमें निर्वाचित Governmentों और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच सत्ता के संतुलन का सवाल अब भी बना हुआ है. एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है.
पीटीआई ने अपने संस्थापक और जेल में बंद पूर्व Prime Minister इमरान खान की रिहाई तथा संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया है. दल दावा कर रहा है कि सत्ता की कलई खोल कर रख देगा. Government कितनी खौफजदा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व पीएम की बहनों को 30 दिन की हिरासत में रख लिया गया है.
सामाजिक नीति विशेषज्ञ क्रिसौला एस्टरियाडू ने प्रेसेंजा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी में प्रकाशित एक लेख में कहा कि 1977 के सैन्य तख्तापलट के करीब पांच दशक बाद भी Pakistan इस बुनियादी सवाल का समाधान नहीं ढूंढ पाया है कि अंतिम Political शक्ति किसके पास होनी चाहिए. ये चुनावों के जरिए वैधता हासिल करने वाली Political संस्थाओं के पास होनी चाहिए या सैन्य प्रतिष्ठान के पास, जिसका प्रभाव उसके संवैधानिक रक्षा दायरे से आगे तक रहा है.
इमरान खान का Political मामला इस विरोधाभास को एक बार फिर Pakistan की राजनीति के केंद्र में ले आया है. हालांकि, उनके Political सफर में भी ऐसे विरोधाभास रहे हैं, जिनकी वह अब आलोचना करते हैं.
2018 में इमरान खान के Prime Minister बनने के बाद उनके Political उभार को लेकर विश्लेषकों और Political विरोधियों ने दावा किया था कि उन्हें सैन्य प्रतिष्ठान का समर्थन हासिल था. खान और उनकी पार्टी पीटीआई ने इन आरोपों को खारिज किया था. इमरान खान के नेतृत्व वाली Government को पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर दबाव, साइबर अपराध कानूनों के इस्तेमाल और Government की आलोचना करने वाली आवाजों को कथित तौर पर डराने-धमकाने को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा था.
बाद में इमरान खान और सैन्य नेतृत्व के बीच संबंध बिगड़ गए. हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, इससे उनके Political उभार से जुड़ा पिछला इतिहास खत्म नहीं हो जाता. बल्कि यह Pakistan की उस Political व्यवस्था को उजागर करता है, जिसमें नागरिक और सैन्य अभिजात वर्ग अपने हितों के मेल के दौरान साथ रहे हैं और सत्ता का संतुलन बदलने पर उनके बीच टकराव भी हुआ है.
रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से कोई भी बात इमरान खान के अधिकारों के किसी उल्लंघन को सही नहीं ठहराती और न ही उनकी लंबे समय से जारी हिरासत की वैधता तथा परिस्थितियों से जुड़े सवालों को अप्रासंगिक बनाती है. हालांकि, Pakistan के मौजूदा संकट को केवल एक लोकतांत्रिक राजनेता और एक सैन्य जनरल के बीच टकराव के रूप में देखना भी पर्याप्त नहीं होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, खान का मामला ऐसी Political व्यवस्था का लक्षण है, जिसमें निर्वाचित सत्ता और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच संबंध लंबे समय से अस्थिर रहे हैं.
Pakistan के मौजूदा सेना प्रमुख असीम मुनीर के कार्यकाल में यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है. सैन्य संस्थान की भूमिका को मजबूत करने वाले कई बदलाव हाल के वर्षों में हुए हैं. मई 2025 में Pakistan Government ने मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया था. वह अयूब खान के बाद Pakistan के इतिहास में यह पद हासिल करने वाले दूसरे सैन्य अधिकारी बने.
इसके बाद नवंबर 2025 में Pakistan ने 27वें संविधान संशोधन के जरिए सैन्य कमान की संरचना में बदलाव किया और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद बनाया. मुनीर को सेना प्रमुख के पद के साथ यह जिम्मेदारी भी दी गई.
इस बीच 27 सितंबर को होने वाले PTI के प्रदर्शन से पहले इमरान खान की बहनों उजमा खान, नोरीन नियाजी और अलीमा खान को हिरासत में लिए जाने की खबर है. Pakistan के अखबार डॉन के अनुसार, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर के आदेश के बाद उजमा खान और नोरीन नियाजी को 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया है.
लाहौर डीसी कार्यालय ने पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस, 1960 के तहत उनकी हिरासत का आदेश दिया. आदेश में उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए प्रतिकूल बताया गया. अलीमा खान को भी Sunday को इसी तरह के आदेश के तहत 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया.
पीटीआई नेताओं ने 13 सितंबर को कहा था कि पार्टी 27 सितंबर को प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च केवल इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर नहीं, बल्कि लोकतंत्र बहाल करने, संविधान की सर्वोच्चता और कानून के शासन को सुनिश्चित करने के लिए भी आयोजित करेगी.
पार्टी नेताओं हारिस तौरो, शाहिद अनवर, रियाजुर रहमान, इंसाफ लॉयर्स फोरम के अध्यक्ष अधिवक्ता सज्जाद अहमद, बख्तशाद खान और अन्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में Pakistan के गंभीर Political और आर्थिक संकट का जिक्र किया था.
उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग के कुछ सदस्यों ने भी स्वीकार किया है कि मौजूदा व्यवस्था विफल हो चुकी है और Pakistan गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है.
इमरान खान को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए पीटीआई ने दावा किया कि वह Pakistan को मौजूदा संकट से बाहर निकालने में सक्षम हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक और कानूनी संस्थाएं कमजोर हुई हैं तथा चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया है.
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केआर/