पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में पीएम मोदी मेरे पिता जैसे हैं: अनिल शास्त्री

New Delhi, 2 अक्टूबर . पूर्व Prime Minister लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके बेटे और पूर्व सांसद अनिल शास्त्री ने Friday को अपने पिता और Prime Minister Narendra Modi की तुलना की. इस दौरान उन्होंने कहा कि Pakistan के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई के मामले में दोनों की सोच एक जैसी है.

से बात करते हुए पूर्व सांसद ने याद दिलाया, “जब Pakistan ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर छंब सेक्टर में हमला किया (1965 के भारत-Pakistan युद्ध के दौरान), शास्त्री जी ने सशस्त्र बलों को जवाबी हमला करने और उसमें लाहौर को भी शामिल करने का आदेश दिया. निर्देशों का पालन करते हुए, हमारी सेना लाहौर की ओर बढ़ी. और अब, ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से, हमारे सशस्त्र बलों ने Pakistan में आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की. इस संदर्भ में, मेरा मानना ​​है कि दोनों नेताओं की सोच एक जैसी रही है.”

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की प्रशंसा करते हुए इसे ‘बिल्कुल सही निर्णय’ बताया.

उन्होंने कहा कि Pakistan को यह समझना चाहिए कि हम उन्हें जैसे को तैसा जवाब देंगे, और भी अधिक बल से. जम्मू और कश्मीर India का अभिन्न अंग है और हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक है. अगर वे सोचते हैं कि वे जम्मू और कश्मीर पर कब्जा कर सकते हैं, तो उनके इरादे हमेशा विफल होंगे.

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि Pakistan को कश्मीर का वह हिस्सा वापस करना चाहिए जिस पर उन्होंने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है.

उन्होंने कहा कि चाहे Pakistan चीन की मदद मांगे, अमेरिका की मदद मांगे, या किसी और की, वह कश्मीर को India से अलग नहीं कर सकता. वास्तव में, उन्हें अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि भी वापस कर देनी चाहिए.

अनिल शास्त्री ने याद किया कि उनके पिता ने सादा जीवन व्यतीत किया, साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि समय बदलता है और समय के साथ सोच भी बदलती है.

हालांकि, उन्होंने कहा कि आज भी Prime Minister मोदी 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र करते हैं और उनके नारे ‘जय जवान, जय किसान’ का उल्लेख करते हैं. आज जो भी Government सत्ता में आए, शास्त्री जी के प्रति सभी के मन में आदर है.

दिवंगत Prime Minister के पुत्र ने कहा कि उनकी जयंती पर हमें लाल बहादुर शास्त्री को केवल एक व्यक्ति के रूप में ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, उनकी सोच, उनकी विचारधारा, उनकी ईमानदारी और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करना चाहिए और इस बात पर विचार करना चाहिए कि इन मूल्यों को आज की पीढ़ी में कैसे समाहित किया जा सकता है. उनका नारा ‘जय जवान, जय किसान’ आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस समय था.

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एमएस/

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