इन लक्षणों को मामूली समझने की गलती पड़ सकती है भारी, हो सकता है स्ट्रोक का शुरुआती संकेत

New Delhi, 4 अक्टूबर . आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर सिरदर्द, चक्कर आना, हाथ-पैरों में कमजोरी या अचानक संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याओं को थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में अचानक दिखाई देने वाले ये बदलाव संभावित स्ट्रोक यानी ब्रेन अटैक के संकेत भी हो सकते हैं? स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति की जान तक जा सकती है. इसलिए जरूरी है कि शरीर के इन संकेतों को समझें और लापरवाही करने से बचें.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, हृदय संबंधी बीमारियां दुनियाभर में मौत का सबसे बड़ा कारण हैं. साल 2022 में करीब 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय संबंधी बीमारियों के कारण हुई, जिनमें लगभग 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह से थीं. स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून की आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है. ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं.

स्ट्रोक का सबसे आम लक्षण चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी आना है. खासतौर पर शरीर के एक तरफ कमजोरी महसूस होना खतरे का संकेत हो सकता है. कई बार व्यक्ति का चेहरा एक तरफ झुकने लगता है या मुस्कुराने पर चेहरे के दोनों हिस्से सामान्य तरीके से काम नहीं करते. इसके अलावा अचानक बोलने में परेशानी होना, जुबान लड़खड़ाना या सामने वाले की बात समझने में दिक्कत होना भी स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देने लगे, चलने में परेशानी हो या शरीर का संतुलन बिगड़ जाए, तो इसे सामान्य चक्कर या कमजोरी समझकर टालना नहीं चाहिए.

कुछ मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है. इसके साथ उल्टी, बेहोशी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस हो सकता है. कई बार ये लक्षण कुछ मिनटों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि खतरा टल गया है. यह मिनी स्ट्रोक यानी ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआईए) हो सकता है, जो भविष्य में बड़े स्ट्रोक की चेतावनी देता है.

स्ट्रोक का खतरा कई कारणों से बढ़ सकता है. अस्वस्थ खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तंबाकू का सेवन, अत्यधिक शराब पीना और मोटापा इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना और अपनी जीवनशैली में सुधार करना बेहद जरूरी है.

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति में अचानक स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए उसे अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाएं या एंबुलेंस बुलाएं. लक्षण शुरू होने का समय नोट करना भी जरूरी है, क्योंकि इलाज के दौरान यह जानकारी काफी मददगार होती है. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें.

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पीआईएम/एएस

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