
जम्मू, 17 सितंबर . रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन (सेवानिवृत्त) अनिल गौर ने कहा कि Pakistan की फितरत कभी नहीं बदलेगी. उसने 1947, 1965, 1971 और कारगिल युद्ध के बाद भी ऑपरेशन टॉपैक और ‘हजार कट्स’ जैसी साजिशों से कश्मीर को तबाह करने की कोशिश की. उन्होंने India द्वारा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कमेटी में अफगान शरणार्थियों का मुद्दा उठाए जाने का समर्थन किया.
अनिल गौर ने कहा, “Pakistan की फितरत नहीं बदलेगी. सब कुछ करने के बावजूद पहलगाम हमला हुआ और हमने Pakistan को कड़ा सबक सिखाया. Pakistan की आदत ‘मैं ना मानूं’ वाली है. Pakistanी फौज और आईएसआई का यही रवैया बन गया है. Pakistan और उसके नेता हमेशा से कश्मीर को हथियाना चाहते हैं.”
रक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि इसी मंशा से Pakistan ने 1947 में ऑपरेशन गुलमर्ग लॉन्च किया था और अपने सैनिकों को कबाइलियों के कपड़े पहनाकर भेज दिया था. वे कबाइली नहीं थे, बल्कि Pakistanी सेना के नियमित जवान थे. उस समय से लेकर आज तक वे अपने लोगों में यही झूठ फैलाते रहे हैं कि ‘कश्मीर बनेगा Pakistan.’
कैप्टन (रिटायर्ड) गौर ने कहा कि कश्मीर तो Pakistan बन नहीं पाया, लेकिन अब Pakistan के ही दो-चार टुकड़े होने वाले हैं, क्योंकि बलूचिस्तान ने अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दी है. खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी ने एक तरह का विरोध शुरू कर दिया है, वहीं सिंध के लोग कहते हैं कि उन पर पंजाबी मुसलमानों और पंजाब क्षेत्र का प्रभुत्व रहा है.
रक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि यह सब हमारा गृह मंत्रालय समय-समय पर देखता रहता है. Pakistan पर इन सब बातों का असर नहीं होता, उसका रवैया यही रहता है कि यह हमारा मामला ही नहीं है, हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं. बाद में Pakistan से ओसामा बिन लादेन जैसा मामला सामने आता है, जो Pakistan के अंदर ही छिपा मिला था. यह सब चलता रहेगा. जो आदमी ‘मैं ना मानूं’ की जिद पर अड़ा हो, उसे आप कैसे समझाएंगे. इससे बेहतर है कि हमें अपना काम करना है, खुद को मजबूत बनाना है और समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा.
रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि India ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कमेटी के सामने अफगान शरणार्थियों का मुद्दा उठाया है. जब तालिबान के शासन में अफगानिस्तान में युद्ध शुरू हुआ, तो लोग देश छोड़कर Pakistan में शरण लेने लगे. ऐसे 40 लाख से ज्यादा, लगभग 50 लाख लोग थे. अचानक, Pakistan ने उन्हें नोटिस जारी करके वापस जाने को कहा. इससे उन लोगों के लिए समस्या खड़ी हो गई है जो इतने सालों से वहां रह रहे थे. Pakistan को समझना चाहिए कि वे बाहरी नहीं हैं. वे उसी इलाके के मुसलमान हैं.
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केके/एबीएम