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Monday, 2 November 2026
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पश्चिम बंगाल : फिरहाद हकीम और सोवन चटर्जी जैसे कई टीएमसी नेताओं का केएमसी चुनाव लड़ने से इनकार

पश्चिम बंगाल : फिरहाद हकीम और सोवन चटर्जी जैसे कई टीएमसी नेताओं का केएमसी चुनाव लड़ने से इनकार

कोलकाता, 2 नवंबर . कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केएमसी) में तृणमूल कांग्रेस के कई पुराने काउंसलरों ने दिसंबर में होने वाला सिविक बॉडी चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. पूर्व मेयर फिरहाद हकीम और सोवन चटर्जी जैसे कई टीएमसी नेताओं ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है.

मेयर-इन-काउंसिल के कई पुराने मेंबर और बोरो चेयरमैन भी मैदान में उतरने से हिचकिचा रहे हैं. उनकी हिचकिचाहट की वजह से तृणमूल कांग्रेस के दो ग्रुप, पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की लीडरशिप वाली डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस, के लिए सभी 209 केएमसी वार्ड के लिए कैंडिडेट ढूंढना मुश्किल हो गया है.

परिसीमन के बाद, सिविक बॉडी में वार्ड की संख्या 144 से बढ़कर 209 हो गई है. चार बार के तृणमूल कांग्रेस विधायक और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी ग्रुप के एक जाने-माने चेहरे हकीम ने सार्वजनिक घोषणा की है कि उनका आने वाले चुनाव को लड़ने का कोई इरादा नहीं है.

फिरहाद हकीम ने बड़ी बेटी प्रियदर्शिनी के चुनाव लड़ने की अटकलों को भी खारिज कर दिया है. हकीम पिछली ममता बनर्जी की Government में कोलकाता के मेयर और पश्चिम बंगाल के म्युनिसिपल मामलों और शहरी विकास मंत्री रहते हुए उस पद पर थे.

कोलकाता के पूर्व मेयर, सोवन चटर्जी ने पहले ही खुद को एक्टिव पॉलिटिक्स से दूर कर लिया है, जिससे दिसंबर में होने वाले सिविक चुनावों में उनके उम्मीदवार बनने की उम्मीद कम है.

केएमसी के पूर्व डिप्टी मेयर अतिन घोष के लिए भी ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है. जिस वार्ड से वह कई सालों तक पार्षद चुने गए थे, वह अब महिलाओं के लिए रिजर्व हो गया है. खबर है कि घोष ने अपने एक करीबी से कहा है कि वह दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने में हिचकिचा रहे हैं.

मेयर-इन-काउंसिल (एमएमआईसी) के दो पूर्व सदस्य, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, वे हैं साउथ कोलकाता से संदीप रंजन बख्शी और नॉर्थ कोलकाता से स्वपन समद्दार.

घनश्री बाह, मनीषा बसु और रत्ना सूर समेत कई दूसरे पुराने पार्षदों ने कहा है कि वे नगर निगम चुनावों से दूर रहेंगे और एक्टिव पॉलिटिक्स से हट जाएंगे.

चुनाव न लड़ने का फैसला करने वाले एक पुराने पार्षद ने कहा, “पार्टी के असली नाम और चुनाव निशान को लेकर कानूनी लड़ाई अभी भी सुलझी नहीं है, इसलिए यह पक्का नहीं है कि उम्मीदवारों को चुनाव और कैंपेन के खर्चों को पूरा करने के लिए पार्टी फंड मिलेगा या नहीं. आजकल, किसी उम्मीदवार के लिए अपनी जेब से पूरा खर्च उठाकर चुनाव लड़ना लगभग नामुमकिन है.”

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एसडी/एबीएम

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