पंजाब में पराली जलाने के 2,347 मामले दर्ज, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 40.37 लाख का जुर्माना लगाया

पटियाला, 5 नवंबर . पंजाब में धान की कटाई के बीच पराली जलाने की घटनाएं लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की 4 नवंबर तक की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पराली जलाने की कुल 2,347 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इन मामलों में विभाग की ओर से 40.37 लाख रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है. अब तक 23.05 लाख रुपए की वसूली की जा चुकी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर 1,942 खेतों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 868 स्थानों पर आग लगने की पुष्टि हुई. इसके अलावा 801 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है. प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए 647 First Information Report दर्ज की गई हैं, जबकि 723 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है. वहीं, संबंधित अधिकारियों की ओर से 689 चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं.
तरनतारन जिले में पराली जलाने की सबसे अधिक 558 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इसके बाद फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207, बठिंडा में 167 और संगरूर में 163 मामले सामने आए हैं. इससे स्पष्ट है कि राज्य के कई जिलों में पराली जलाने की समस्या अभी भी बनी हुई है.
पटियाला में अब तक पराली जलाने की 110 घटनाएं दर्ज की गई हैं. विभाग की ओर से 67 स्थानों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 24 स्थानों पर आग की पुष्टि हुई. इन मामलों में 15 पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है. कुल 80 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 35 हजार रुपए की वसूली हो चुकी है. वहीं, पराली जलाने के मामलों में 21 First Information Report दर्ज की गई हैं और 10 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है. जिले में 25 चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं.
पीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में कुल 32.87 लाख हेक्टेयर धान क्षेत्र में से 85.10 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई पूरी हो चुकी है. इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं. विभागीय आंकड़े बताते हैं कि प्रशासन की ओर से निरीक्षण, जुर्माना, First Information Report और अन्य कार्रवाई की जा रही है, लेकिन खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.
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ओपी/वीसी


