नेपाल बाढ़ में मृतकों की संख्या 270, 800 लोगों से नहीं हो पाया संपर्क

काठमांडू, 27 अगस्त . नेपाल Police ने Thursday दोपहर पुष्टि की कि Wednesday को आए विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या 270 तक पहुंच गई है और नदी के बहाव की दिशा में पड़ने वाले कई जिलों से अभी भी शव बरामद किए जा रहे हैं.

चीन के तिब्बती इलाके से शुरू हुई जबरदस्त बाढ़ सीमा पार बहने वाली भोटेकोशी नदी से होते हुए नेपाल में तबाही मचाती हुई गुजरी.

Police के अनुसार, सबसे ज्यादा 108 शव दक्षिणी मैदानी इलाकों के चितवन जिले से बरामद किए गए, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 62, धाडिंग से 27 और रसुवा से 17 शव मिले.

नेपाल की Government ने कहा कि बाढ़ के कारण रिहायशी इलाकों, पनबिजली परियोजनाओं, कस्टम कार्यालयों और बिजली के बुनियादी ढांचे तहस-नहस हो गए और इस वजह से 800 से ज्यादा लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

इस बीच, निजी क्षेत्र के बिजली डेवलपर्स संगठन ‘इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल’ (आईपीपीएएन) ने कहा कि अलग-अलग पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले कई कर्मचारी लापता हैं.

बन रही 216-मेगावाट की ‘अपर त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना’ में काम करने वाले ‘एंड्रिट्ज हाइड्रो’ के 76 कर्मचारी लापता हैं. इनमें से लगभग आधे नेपाली और आधे विदेशी नागरिक हैं.

परियोजना डेवलपर ‘नेपाल वॉटर एंड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी’ के 11 कर्मचारी भी लापता हैं. परियोजना पर काम कर रहे आठ दक्षिण कोरियाई नागरिक भी इस मिसिंग लिस्ट में शामिल हैं.

इसी तरह, 111-मेगावाट की ‘रसुवागढ़ी पनबिजली परियोजना’ में काम करने वाले 51 लोग, जबकि 5-मेगावाट की ‘मैलुंग खोला पनबिजली परियोजना’ के पावरहाउस में काम करने वाले आठ कर्मचारी भी लापता हैं.

120-मेगावाट की ‘रसुवा भोटेकोशी पनबिजली परियोजना’ में काम करने वाले सिविल कॉन्ट्रैक्टर ‘सिनोहाइड्रो’ के दो कर्मचारी लापता हैं.

इस बीच, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पुष्टि की कि हिमालयी देश में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद करीब 300 भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर है, जिनमें से ज्यादातर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्री थे.

काठमांडू में एनडीटीवी वर्ल्ड अन्वीक्षा समिट में खनाल ने कहा कि रसुवा इलाके में हुई इस त्रासदी के बाद हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है, जबकि अधिकारी तबाही के पैमाने का आकलन करने और लापता लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

खनाल ने कहा, “कुछ ही घंटों में एक के बाद एक कई शहर तबाह हो गए. हजारों परिवारों के घर उजड़ गए और वे अभी लापता हैं. हम अभी भी इस आपदा से हुए कुल नुकसान का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.”

खनाल ने कहा, “भारतीयों समेत कई विदेशी नागरिक मानसरोवर यात्रा के लिए आपदा ग्रस्त इलाके से होकर गुजरते हैं. लगभग 300 भारतीयों के लापता होने की खबर है और Government उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही है.”

मंत्री ने बताया कि आपदा के बाद लगभग 500 विदेशी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि बाढ़ पीड़ित इलाकों में बचाव और राहत टीमें लगातार काम कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि नेपाल Government लापता विदेशी नागरिकों की सुरक्षा और उनके ठिकाने के बारे में अलग-अलग देशों के दूतावासों से जानकारी एकत्रित कर रही है.

केआर/

Leave a Comment