
New Delhi, 27 अगस्त . दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने Thursday को कहा कि राखी का धागा सिर्फ सुरक्षा का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों और आने वाली पीढ़ी के बीच एक मजबूत, जागरूक और जिम्मेदार India बनाने का एक पक्का वादा है.
विधानसभा में जब छात्रों ने स्पीकर की कलाई पर राखियां बांधीं, तो उन्होंने उनके उत्साह का स्वागत किया और सभी छात्रों को उनके भविष्य की शुभकामनाएं दी.
उन्होंने छात्रों को पढ़ाई-लिखाई में अच्छा करने और ऊंचे नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.
स्पीकर ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ”रक्षाबंधन के पावन पर्व पर विधानसभा में विभिन्न विद्यालयों से आई छात्राओं ने मुझे राखी बांधकर अपने स्नेह और शुभकामनाओं से इस पर्व को यादगार बना दिया. बच्चों के साथ बिताया यह स्नेहभरा पल मन में हमेशा याद रहेगा. सभी बहनों के सुख, उज्ज्वल भविष्य और सफलता की कामना करता हूं. रक्षाबंधन की शुभकामनाएं.”
एक अन्य पोस्ट में स्पीकर ने लिखा कि युवा सोच ही हमारे लोकतंत्र के भविष्य को आकार देने वाली सबसे बड़ी ताकत है. ‘यूथ आउटरीच इनिशिएटिव’ के तहत दिल्ली विधानसभा के दौरे पर आए दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस, सत्यवती कॉलेज और लक्ष्मीबाई कॉलेज के छात्रों के साथ बहुत ही ज्ञानवर्धक बातचीत हुई. उनकी जिज्ञासा और उत्साह से लोकतांत्रिक संस्थाओं और एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर अपनी भूमिका को समझने में उनकी गहरी रुचि साफ झलक रही थी.
इस दौरान छात्रों को लोकतांत्रिक शासन में दिल्ली असेंबली की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई.
कार्यक्रम में विधायी प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. इसमें कानून कैसे बनते हैं, उन पर कैसे बहस होती है और वे कैसे पास होते हैं, इस बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई.
इस शैक्षिक सत्र के साथ एक दिलचस्प शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई.
छात्रों को ‘एक शताब्दी यात्रा’ नाम की एक यादगार कॉफी टेबल बुक भी भेंट की गई, जिसमें विधायी इतिहास की एक सदी का दस्तावेजीकरण किया गया है. इसके बाद उन्हें असेंबली हाउस के चैंबर का गाइडेड टूर कराया गया ताकि वे स्थानीय शासन के कामकाज के केंद्र को देख सकें.
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज की जीवंतता जानकारी रखने वाले, जागरूक और सक्रिय युवाओं पर निर्भर करती है. लोकतांत्रिक संस्थानों को काम करते हुए सीधे देखकर, युवा नागरिक अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा और ऊर्जा को सार्थक नागरिक भागीदारी, जवाबदेही और जनसेवा में बदल सकते हैं.
इस कार्यक्रम में कई संस्थानों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
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एससीएच/एबीएम