नई दिल्ली : पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मोदी ‘भजन क्लबिंग’ में हुए शामिल

New Delhi, 25 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi ने Friday शाम को भारतीय जनसंघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित ‘भजन क्लबिंग’ में भाग लिया.

दरअसल, ‘भजन क्लबिंग’ युवाओं, खासकर जेनजी के बीच एक तेजी से उभरते अध्यात्मिक ट्रेंड में शामिल है. इसमें पारंपरिक भजनों और कीर्तनों को आधुनिक तरीके से पेश किया जाता है.

इस कार्यक्रम के एक वीडियो में Prime Minister मोदी को दर्शकों के बीच पहली पंक्ति में बैठे देखा गया, जबकि मंच पर गायक और संगीतकार भक्ति गीत गा रहे थे. कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी खंजरी भी बजाते दिखे.

इससे पहले दिन में Prime Minister मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अंत्योदय दर्शन को जन कल्याण और राष्ट्रीय विकास का आधार बताया.

उन्होंने एक पोस्ट में इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे पंडित दीनदयाल का दृष्टिकोण आज भी समकालीन नीतियों और जमीनी स्तर पर सशक्तीकरण को दिशा देता है.

Prime Minister मोदी ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि राष्ट्र सेवा के सच्चे अनुयायी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी जयंती पर मेरी श्रद्धांजलि. उन्होंने समाज के सबसे निचले तबके के व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और हमें अंत्योदय का दर्शन दिया, जो आज भी जन कल्याण के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है.

Prime Minister ने नागरिकों से इस विचारक की विरासत को अपनाने का आग्रह करते हुए आगे कहा, “आइए, इस विशेष अवसर पर उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने और अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के अपने संकल्प को दोहराएं. प्रयास करने से ही फल मिलता है.”

वहीं, प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि Prime Minister मोदी ने सभी से उनके आदर्शों को आत्मसात करने और सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का आह्वान किया और एक संस्कृत सुभाषितम भी साझा किया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि सफलता और नवाचार भाग्य से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और साहस से प्राप्त होते हैं.

दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था और वे भारतीय जनसंघ के एक प्रमुख Political नेता के रूप में उभरे.

उपाध्याय ने हिंदुत्व पुनरुत्थान के आदर्शों को फैलाने के लिए 1940 के दशक में ‘राष्ट्र धर्म’ नामक मासिक प्रकाशन की शुरुआत की, जिसका व्यापक अर्थ ‘राष्ट्रीय कर्तव्य’ है. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक थे.

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एमएस/एबीएम

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