
New Delhi, 1 अक्टूबर . Prime Minister Narendra Modi की ओर से Thursday को social media प्लेटफॉर्म एक्स पर धैर्य और दृढ़ निश्चय का संदेश देते हुए सुभाषित साझा किया गया. पीएम की ओर से बताया गया कि धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति भी अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक निरन्तर प्रयत्नशील रहते हैं.
Prime Minister मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “रत्नैर्महाब्धेस्तुतुषुर्न देवा न भेजिरे भीमविषेण भीतिम्. सुधां विना न प्रययुर्विरामं न निश्चितार्थाद्विरमन्ति धीराः॥” साझा किया गया. इसका भावार्थ है कि जिस प्रकार देवताओं ने समुद्र से रत्नों को प्राप्त करने के बाद भी अमृत की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयत्न किया, उसी प्रकार धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति भी अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं.
Prime Minister की ओर से यह श्लोक महर्षि भर्तृहरि के प्रसिद्ध ग्रंथ नीतिशतकम् से साझा किया गया है. इस श्लोक के माध्यम से बताया गया है कि समुद्र मंथन के दौरान मूल्यवान रत्नों को पाकर देवता संतुष्ट नहीं हुए, भयंकर विष से डरे नहीं और अमृत मिलने तक वे नहीं रुके; इसी प्रकार धैर्यवान (धीर) लोग अपने निश्चित लक्ष्य को प्राप्त किए बिना कभी पीछे नहीं हटते.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उससे सबसे पहले कई प्रकार की बहुमूल्य वस्तुएं और रत्न निकले. रास्ते में भयंकर विष हलाहल भी निकला और अंत में अमृत निकला. मंथन में मणियां और सुंदर वस्तुएं मिलीं, जिन्हें देखकर कोई भी सामान्य व्यक्ति लालच में आ सकता था लेकिन देवताओं का लक्ष्य सिर्फ अमृत पाना था. वे छोटे-छोटे लाभों या प्रलोभनों में फंसकर संतुष्ट नहीं हुए.
इस श्लोक का भावार्थ है कि जीवन में बड़ी सफलता पाने के लिए प्रलोभनों से ऊपर उठना होगा, संकटों का सामना करना होगा और अपने ध्येय के प्रति अडिग रहना होगा. जब भयानक विष निकला, तो सारा संसार भयभीत हो सकता था लेकिन देवताओं ने उस संकट से घबराकर अपने कदम पीछे नहीं खींचे. जब तक उन्हें अमृत नहीं मिल गया, तब तक उन्होंने अपने प्रयासों को नहीं रोका.
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एसडी/पीएम