तमिलनाडु : बांधों में जलस्तर गिरकर 34 प्रतिशत हुआ; पीने के पानी को लेकर चिंता बढ़ी

चेन्नई, 1 अक्टूबर . तमिलनाडु के 90 बांधों में पानी का भंडार उनकी कुल क्षमता के लगभग 34 प्रतिशत तक गिर गया है. लगातार गर्मी के कारण 63 जलाशयों में पानी उनकी क्षमता के एक-चौथाई से भी कम रह गया है, जिससे सिंचाई और पीने के पानी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है.

जल संसाधन विभाग की देखरेख में आने वाले इन बांधों में कुल मिलाकर 224 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसीएफटी) पानी जमा करने की क्षमता है. हालांकि, अभी इनमें सिर्फ 76.4 टीएमसीएफटी पानी है, जो कई जिलों में जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को दिखाता है.

अलग-अलग नदियों पर बने ये जलाशय खेती में मदद करते हैं, पीने का पानी सप्लाई करते हैं और बिजली बनाने की जरूरतें पूरी करते हैं. इनमें से कई पश्चिमी घाट में हैं, जहां ये जंगली जानवरों और पक्षियों के लिए पानी के अहम स्रोत भी हैं. पानी के भंडार में भारी कमी के कारण आने वाले उत्तर-पूर्वी मानसून पर निर्भरता बढ़ गई है.

जल संसाधन विभाग और पेयजल बोर्ड के अधिकारी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि जलाशयों में पानी फिर से भर सके और आने वाले महीनों में मांग पूरी की जा सके.

90 बांधों में से 63 में पानी का भंडार बहुत कम हो गया है और जलस्तर उनकी क्षमता के 25 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है. कुछ बांधों में तो इस्तेमाल लायक पानी बहुत कम बचा है, जिससे जमा हुई गाद और मिट्टी दिखाई देने लगी है. 17 बांधों में पानी का भंडार लगभग 17 प्रतिशत बताया जा रहा है. जलाशयों में गाद और कचरा जमा होने से स्थिति और खराब हो गई है, क्योंकि उनकी ठीक से सफाई नहीं की गई है. ये जमाव पानी जमा करने की असली क्षमता को कम कर देते हैं, जिससे बारिश बेहतर होने पर भी उपलब्ध पानी की मात्रा सीमित हो सकती है.

हालांकि गर्मी का मौसम खत्म हो गया है, फिर भी कई जिलों में तेज गर्मी पड़ रही है. लंबे समय तक गर्मी बने रहने की वजह अल-नीनो का असर माना जा रहा है, जिससे जलाशयों में पानी की कमी को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

अगर बिना अच्छी बारिश के मौजूदा हालात बने रहते हैं, तो कई जिलों में पीने के पानी की जरूरतें पूरी करना बहुत मुश्किल हो सकता है. पानी का भंडार कम होने से उन खेतों के लिए भी पानी की उपलब्धता पर खतरा मंडरा रहा है जो बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर हैं.

ये आंकड़े पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने में बारिश और जलाशयों के रखरखाव, दोनों के महत्व को रेखांकित करते हैं.

हालांकि उत्तर-पूर्वी मानसून से राहत मिल सकती है लेकिन जमा हुई गाद चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि यह ताजे पानी के बहाव को रोकने और जमा करने की क्षमता को सीमित करती है. जलाशयों के फिर से भरने की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि खाली हो चुके जलाशयों और जलग्रहण क्षेत्रों में कितनी बारिश होती है.

फिलहाल, खाली हो चुके जलाशयों के कारण जल प्राधिकरण बारिश में काफी सुधार पर निर्भर हैं. प्रभावित जिलों में घरों, खेती और अन्य उपभोक्ताओं के लिए पानी की कमी को दूर करने और सप्लाई बहाल करने के लिए आने वाला मानसून बहुत अहम होगा.

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एससीएच/पीएम

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