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Sunday, 1 November 2026
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दिल्ली हाट में गोधन दिवाली महोत्सव शुरू, सुधांशु महाराज बोले-सड़क पर भटकती गायों पर ध्‍यान देने की जरूरत

दिल्ली हाट में गोधन दिवाली महोत्सव शुरू, सुधांशु महाराज बोले सड़क पर भटकती गायों पर ध्‍यान देने की जरूरत

दिल्ली हाट में गोधन दिवाली महोत्सव शुरू, सुधांशु महाराज बोले-सड़क पर भटकती गायों पर ध्‍यान देने की जरूरत

नई दिल्‍ली, 1 नवंबर . राष्ट्रीय गोधन महासंघ ने दिल्‍ली में Sunday को जनकपुरी के दिल्ली हाट में सात दिवसीय ‘गोधन दिवाली महोत्सव’ का आयोजन किया. असम के पूर्व Governor जगदीश मुखी और कथावाचक सुधांशु महाराज इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए. यहां गाय के गोबर से बने विभिन्न उत्पादों और उपयोगी वस्तुओं की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई.

जगदीश मुखी कहते हैं, “राष्ट्रीय गोधन महासंघ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम शुरू हुआ है और हम इसके उद्घाटन समारोह में शामिल हुए. राष्ट्रीय गोधन महासंघ के अध्यक्ष विजय खुराना ने यहां बहुत सुंदर व्यवस्था की है. इसका उद्देश्य गाय के गोबर और गोमूत्र से बने उत्पादों की बिक्री को बढ़ाना है.”

जगदीश मुखी ने को बताया कि गाय के गोबर और गोमूत्र से बने उत्पादों की बिक्री को बढावा देने की जरूर है. मैन्‍यूफैक्‍चरर गाय के गोबर या गोमूत्र से बने उत्‍पाद लेकर आए हैं. कुछ गोशालाएं अपने उत्‍पाद बनाते हैं, वह भी उसे लेकर आए हैं. इसके पीछे लक्ष्‍य है कि गाय के गोबर और गोमूत्र की मांग तेजी से बढ़नी चाहिए. मांग बढ़ने पर इनकी कीमतों में इजाफा होगा. इससे लोगों को लाभ होगा और गौहत्‍या पर अंकुश लगेगा. गाय को बचाना और उसका संवर्धन करना है. गोवंश पर संवर्धन की भी जरूरत है.

सुधांशु महाराज ने समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान बताया कि आज सबसे महत्‍वपूर्ण बिंदु गोसंरक्षण रहा. उन्‍होंने कहा कि गोसंरक्षण का काम होना चाहिए लेकिन इससे ज्‍यादा इस बात पर ध्‍यान दिया जाए कि गोपालक के साथ गोसेवक बनें. सड़क पर गाय भटकती रहती हैं, इस पर ध्‍यान देने की जरूरत है.

उन्‍होंने कहा कि गांव में किसान यूरिया खाद को लेकर परेशान हो रहे हैं. यदि जैविक खाद से लेकर गोमाता से उत्‍पन्‍न गोबर से खाद के संयंत्र लग जाए तो कई तरह के ऐसे कार्य हो सकते हैं कि जिससे हमारी भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है. आज के समय में रासायनिक खाद के प्रयोग से खेतों की उर्वरता को खत्‍म किया जा रहा है. यूरिया खरीदने के चक्‍कर में किसान कर्जदार बन रहा है. खाद के संयंत्र के इस्‍तेमाल से किसानों को लाभ होगा और खेतों की उर्वरता को वापस लाया जा सकता है.

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एएसएच/वीसी

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