दिल्ली दंगा मामला: ताहिर हुसैन दंगा भड़काने के आरोप में दोषी करार, सात सह-आरोपी बरी

New Delhi, 10 अक्टूबर . दिल्ली की एक अदालत ने Saturday को फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने में मदद करने के आरोप में दोषी करार दिया. हालांकि, अदालत ने उन्हें अन्य आरोपों से बरी कर दिया. इस मामले में सात अन्य आरोपियों को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया गया.

कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में एक दुकान में लूटपाट और आगजनी से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया. अदालत ने मामले में ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने में मदद करने के आरोप में दोषी ठहराया, जबकि अन्य अपराधों से उन्हें बरी कर दिया.

अदालत ने दोषी ठहराए गए ताहिर हुसैन की सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है.

यह मामला दयालपुर इलाके के एक दुकानदार की शिकायत से जुड़ा है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी 2020 को उसकी दुकान में लूटपाट करने के बाद आग लगा दी गई थी. शिकायत के मुताबिक, दुकान से 17 से 18 लाख रुपये का सामान चोरी हुआ था, जबकि संपत्ति को करीब 10 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा था.

इस मामले में दयालपुर Police स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा), 427 (नुकसान पहुंचाने वाली शरारत), 436 (घर आदि को नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

फरवरी 2020 के दंगों से जुड़े मामलों में ताहिर हुसैन को दूसरी बार दोषी ठहराया गया है. इससे पहले, खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. कड़कड़डूमा कोर्ट ने अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस मामले में छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था.

ताहिर हुसैन ने अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. सितंबर में हाईकोर्ट ने उनकी अपील पर दिल्ली Police को नोटिस जारी किया था. साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया था कि उनकी अपील पर दो दिसंबर को इस मामले में अन्य दोषियों की संबंधित अपीलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए.

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी. हिंसा में कई अन्य लोग घायल हुए थे और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा था.

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डीएससी

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