तृणमूल के नाम और चुनाव चिह्न पर 12 सितंबर को सुनवाई, दोनों गुटों के साथ चुनाव आयोग की बैठक

कोलकाता, 9 सितंबर . चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बहुमत वाले गुट के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से 12 सितंबर को मुलाकात की मंजूरी दी थी. अब आयोग ने पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से भी उसी दिन और उसी स्थान पर मुलाकात के लिए सहमति दी है.

ऋतब्रत बनर्जी गुट के साथ बैठक का समय 12 सितंबर को सुबह 11 बजे तय किया गया है, जबकि ममता बनर्जी गुट को दोपहर 12 बजे का समय दिया गया है.

दोनों गुटों के साथ यह बैठक New Delhi स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में होगी.

हालांकि, चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को भेजे गए पत्र में बैठक का एजेंडा स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चर्चा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों के दावों को लेकर होगी.

चुनाव आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहल ने दोनों गुटों से उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम और वाहनों की जानकारी मांगी है, ताकि आवश्यक व्यवस्था की जा सके.

सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के भविष्य पर फैसला करेगा.

आयोग द्वारा भेजे गए पत्र में ऋतब्रत बनर्जी से उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों और उनके वाहनों का विवरण देने को कहा गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिनिधिमंडल में अधिकतम पांच सदस्य होंगे.

चुनाव आयोग का यह पत्र ऋतब्रत बनर्जी गुट की ओर से समय मांगने के लिए भेजे गए पहले पत्र के जवाब में जारी किया गया है.

हालांकि आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अंतिम फैसला 16 सितंबर से पहले लिया जाएगा, क्योंकि पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर है.

Political विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग के पास दो विकल्प हैं.

पहला विकल्प यह है कि आयोग तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक चुनाव चिह्न को दोनों में से किसी एक गुट को आवंटित कर दे. ऐसी स्थिति में वही गुट उपचुनाव में आधिकारिक चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतर सकेगा.

दूसरा विकल्प यह है कि अंतिम निर्णय होने तक आयोग किसी भी गुट को चुनाव चिह्न आवंटित न करे. ऐसी स्थिति में दोनों में से कोई भी गुट उपचुनाव आधिकारिक चुनाव चिह्न पर नहीं लड़ पाएगा.

Political हलकों में माना जा रहा है कि 12 सितंबर की बैठक और उसके बाद चुनाव आयोग का फैसला तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद की दिशा तय कर सकता है.

एएमटी/एबीएम

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