तमिलनाडु: सीपीआई-एम ने परंदूर एयरपोर्ट की जमीन किसानों को वापस करने की मांग की

चेन्नई, 26 अगस्त . सीपीआई-एम तमिलनाडु के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने Wednesday को Government से मांग की कि प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस कर दी जाए. उन्होंने एयरपोर्ट की योजना रद्द होने के बाद इस जमीन का इस्तेमाल वैकल्पिक औद्योगिक परियोजनाओं के लिए किए जाने के विचार का विरोध किया.

एक बयान में, शनमुगम ने कहा कि Wednesday को तमिलनाडु विधानसभा में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद अधिग्रहित जमीन के भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है. विधायकों ने Government से स्पष्टीकरण मांगा कि एयरपोर्ट परियोजना के लिए पहले ही ली जा चुकी जमीन का इस्तेमाल वह किस तरह करने का इरादा रखती है.

सवालों का जवाब देते हुए उद्योग मंत्री ने संकेत दिया कि जमीन का इस्तेमाल अन्य औद्योगिक उपक्रमों के लिए किया जा सकता है. शनमुगम ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि Government किसी खास सार्वजनिक उद्देश्य के लिए अधिग्रहित जमीन को मूल योजना को छोड़ने के बाद किसी बिल्कुल अलग परियोजना के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकती.

उन्होंने अपनी मांग के समर्थन में ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ का हवाला दिया. शनमुगम के अनुसार, कानून के तहत किसी विशिष्ट परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन को उसके मूल मालिकों को वापस करना जरूरी है, अगर वह पांच साल तक इस्तेमाल न हो या परियोजना ही छोड़ दी जाए. उन्होंने कहा कि कानून अधिकारियों को ऐसी जमीन को अनिश्चित काल तक अपने पास रखने या किसी दूसरी योजना में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं देता है. इसलिए, उन्होंने तर्क दिया कि परंदूर की जमीन का इस्तेमाल किसी असंबंधित औद्योगिक विकास के लिए करने की कोई भी कोशिश कानून का उल्लंघन होगी.

परंदूर में प्रस्तावित एयरपोर्ट का अधिग्रहण के लिए चिह्नित गांवों के किसानों और निवासियों ने लंबे समय तक विरोध किया था. प्रदर्शनकारियों ने बार-बार चेतावनी दी थी कि इस परियोजना से उपजाऊ कृषि भूमि, घरों और आजीविका का नुकसान होगा, साथ ही जल निकायों और व्यापक स्थानीय पर्यावरण पर भी असर पड़ेगा.

शनमुगम ने कहा कि Government को यह बात माननी चाहिए कि किसानों ने अपनी जमीन सिर्फ इसलिए दी थी क्योंकि उसे एयरपोर्ट के लिए लिया जा रहा था. जब वह मकसद ही खत्म हो गया, तो राज्य की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह जमीन किसानों को वापस करे, न कि उनकी मंजूरी के बिना उसका इस्तेमाल किसी और काम के लिए करे.

उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वे अधिग्रहित जमीन का इस्तेमाल दूसरे उद्योगों के लिए करने का कोई भी प्रस्ताव वापस लें और तुरंत उसे मूल जमीन-मालिकों को वापस करने की प्रक्रिया शुरू करें. उन्होंने जोर देकर कहा कि Government को यह भी पक्का करना चाहिए कि एयरपोर्ट प्रोजेक्ट रद्द होने के बाद लिए गए प्रशासनिक फैसलों से किसानों के अधिकारों का हनन न हो.

एमएस/

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