ट्रंप ने डीजल आयात का व‍िरोध करने वाले रिपब्लिकन सीनेटरों की आलोचना की, कहा- वे ‘गंभीर’ नहीं हैं

वॉशिंगटन, 13 अक्टूबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने उन रिपब्लिकन सीनेटरों की आलोचना को खारिज कर दिया है जो रूस से डीजल आयात करने के उनके फैसले का विरोध कर रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि ये नेता ‘गंभीर’ नहीं हैं. ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर डीजल पर कोई ‘कैप’ या प्रतिबंध भी लगा सकता है.

यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले महीने उनके द्वारा हस्ताक्षरित एक कानून में कहा गया था क‍ि 18 अक्टूबर से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाया जा सकता है.

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने रूसी President व्लादिमीर पुतिन के साथ हुए इस समझौते का बचाव किया.

ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि ये ऐसे रिपब्लिकन हैं जो वास्तव में गंभीर नहीं हैं. हम बहुत सारा तेल पैदा करते हैं. हम तेल पर प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा किया तो दुनिया के बाकी देशों पर इसका बहुत बड़ा असर पड़ेगा.”

उन्होंने आगे कहा, “हम डीजल पर भी कोई सीमा या प्रतिबंध लगा सकते हैं और उसे सिर्फ अपने लिए रख सकते हैं. इसका भी बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा.”

ट्रंप ने कहा क‍ि यह सिर्फ मेरे लिए कोई समझौता नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है. अगर इससे हमारे किसानों और पशुपालकों को कोई फायदा पहुंचता है, तो मुझे यह पसंद है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि डीजल पर संभावित सीमा कैसे लागू होगी, क्या यह निर्यात पर लागू होगी या घरेलू आपूर्ति पर और रूस से डीजल खरीदने के साथ इसका तालमेल कैसे बैठेगा.

ट्रंप के इस फैसले की आलोचना करने वाले रिपब्लिकन नेताओं में अलास्का की सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की, मेन की सीनेटर सुसान कॉलिन्स, नॉर्थ कैरोलिना के थॉम टिलिस और यूटा के जॉन कर्टिस शामिल हैं. उन्होंने डेमोक्रेटिक सीनेटरों जीन शाहीन, रॉन वाइडन और रिचर्ड ब्लूमेंथल के साथ Sunday को एक संयुक्त बयान जारी कर प्रशासन से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की.

मर्कोव्स्की ने उस प्रतिबंध कानून का जिक्र किया, जिस पर ट्रंप ने तीन हफ्ते पहले हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने कहा, “President को इन अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए, न कि रूस को डीजल निर्यात करके राजस्व कमाने और यूक्रेन में युद्ध जारी रखने की अनुमति देनी चाहिए.”

वहीं, सुसान कॉलिन्स ने कहा, “मैं रूसी प्रतिबंध कानून की सह-प्रायोजक थी, जिस पर President ने हाल ही में हस्ताक्षर किए, लेकिन अब उसका पालन नहीं कर रहे हैं.”

पब्लिक लॉ 119-111, जिसे दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम से जोड़ा गया है, President को रूसी मूल के कच्चे तेल और उससे जुड़े ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देता है. हालांकि, राष्ट्रीय हित का हवाला देकर इन शुल्कों में छूट भी दी जा सकती है.

इस कानून के तहत पहला शुल्क 18 अक्टूबर से प्रभावी हो सकता है. हालांकि प्रशासन ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि India इस सूची में शामिल होगा या नहीं.

साल 2022 से India रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल रहा है. ट्रंप ने अगस्त 2025 में इन्हीं खरीदों को लेकर भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था.

New Delhi लंबे समय से यह कहती रही है कि उसके साथ अलग मानक अपनाया जा रहा है. अगस्त में विदेश मंत्रालय ने कहा था, “अमेरिका खुद अपने परमाणु उद्योग के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए पैलेडियम, साथ ही उर्वरक और रसायन आयात करता है.”

ट्रंप ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि रूस तुरंत लगभग 3 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा और कुल आपूर्ति लगभग 50 लाख टन तक पहुंचेगी. उनकी Government फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद बढ़ी ईंधन कीमतों को कम करने की कोशिश कर रही है.

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने Friday को जनरल लाइसेंस 135 जारी किया, जिसके तहत रूसी मूल के डीजल से जुड़े लेन-देन की अनुमति दी गई है.

गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिकी कांग्रेस ने वर्ष 2022 में रूस से ऊर्जा आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

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एवाई/एएस

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