
कोलकाता, 12 सितंबर . तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के निर्वाचन आयोग से मुलाकात के लिए दिल्ली रवाना होने पर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि दिल्ली जाना कोई बड़ी बात नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष और निर्वाचन आयोग विचार कर रहे हैं और अंतिम फैसला वहीं से आएगा.
दिलीप घोष ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “बहुत से लोग दिल्ली जाते हैं. वे भी गई हैं. इंतजार कीजिए और देखिए.”
उन्होंने कहा कि अब यह देखना होगा कि इस मामले में टीएमसी का भविष्य क्या होता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में जो भी फैसला होगा, वह संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की ओर से ही आएगा.
टीएमसी के चुनाव चिह्न ‘घास पर दो फूल’ को लेकर भी दिलीप घोष ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जब तक निर्वाचन आयोग की ओर से अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर चर्चा जारी रहेगी. फिलहाल यह तय नहीं है कि टीएमसी का मौजूदा चुनाव चिह्न आगे भी बरकरार रहेगा या नहीं.
ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के बीच दिलीप घोष का यह बयान Political रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल की निर्वाचन आयोग से होने वाली मुलाकात में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की संभावना है. ऐसे में सभी की नजर आयोग के रुख पर टिकी हुई है.
कालीघाट मंदिर में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के मछली खाने को लेकर उठे विवाद पर भी दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे मंदिर हैं जहां मछली का प्रसाद चढ़ाया जाता है. उनके मुताबिक पूजा-पाठ की अलग-अलग परंपराएं, जीवनशैली और व्यक्तिगत पसंद होती है.
दिलीप घोष ने कहा कि किसी व्यक्ति के खान-पान या पूजा करने के तरीके को चर्चा का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद और फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.
पश्चिम बंगाल में कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कालीघाट मंदिर पहुंचे सुवेंदु अधिकारी ने मां काली की पूजा-अर्चना की और इसके बाद पारंपरिक मछली भोग ग्रहण किया. सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि कौशिकी अमावस्या सनातन परंपरा का बेहद महत्वपूर्ण दिन है. कालीघाट और तारापीठ समेत पश्चिम बंगाल के प्रमुख मंदिरों में इस अवसर पर विशेष पूजा आयोजित की जाती है.
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एसएके/वीसी