
बाराबंकी, 12 सितंबर . उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में घाघरा नदी का जलस्तर भले ही थोड़ा कम हुआ हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. रामनगर तहसील क्षेत्र के हेतमापुर गांव में मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं. नदी की तेज धारा अब लोगों के आशियानों को एक-एक कर अपने आगोश में ले रही है. कोई अपनी आंखों के सामने अपना घर टूटता देख रहा है, तो कोई अपनी जिंदगी भर की कमाई को बहता देखकर फूट-फूटकर रो रहा है.
अब सबसे बड़ा खतरा हेतमापुर के प्रसिद्ध श्री बाबा नारायण दास मंदिर और बगल की मस्जिद पर मंडरा रहा है. बेकाबू कटान के आगे लोग बेबस नजर आ रहे हैं. वहीं, प्रशासन ओर से इस तबाही को रोकने में जुटा है.
घाघरा अपने जलस्तर से लगभग 14 सेमी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, लेकिन धार अब भी बेहद खतरनाक बनी हुई है. जबरदस्त कटान के चलते हेतमापुर गांव में एक के बाद एक घर नदी में समाते जा रहे हैं. किसी ने अपने घर का सामान बाहर निकाल लिया है, तो कोई मजबूरी में अपने आशियाने को खुद ही तोड़ रहा है, ताकि कम से कम घर का कुछ सामान बचाया जा सके.
इस मंजर ने ग्रामीणों को अंदर तक झकझोर दिया है. अब सबसे बड़ी चिंता श्री बाबा नारायण दास मंदिर को लेकर है. मंदिर के बेहद करीब पहुंच चुकी घाघरा की धारा से खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. मंदिर के बगल में मौजूद मस्जिद पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है.
नदी की धारा कब किस जमीन को अपने साथ बहा ले जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. देखते ही देखते जमीन कटती है और लोगों के आशियाने घाघरा में समा जाते हैं. लगातार हो रही इस तबाही को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त गुस्सा भी देखने को मिल रहा है. लोग प्रशासन से कटान रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम की मांग कर रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ जिला प्रशासन भी अब पूरी ताकत के साथ कटान रोकने में जुटा है. मौके पर बाढ़ खंड के अधिकारी और कर्मचारी युद्ध स्तर पर बचाव एवं कटान रोकने के प्रयास में लगे हुए हैं. वहीं, एसडीएम भी मौके पर पहुंचकर लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं.
फिलहाल प्रशासन की कोशिश यही है कि घाघरा की इस खतरनाक धार को आबादी और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने से रोका जा सके.
एसडीएम आकांक्षा गुप्ता ने बताया कि बाढ़ से ग्रसित लोगों को भोजन मुहैया कराया जा रहा है. इसके साथ ही जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी. जिन लोगों के घर नदी कटान में चले गए हैं, उनके रहने के लिए व्यवस्था कर रहे हैं. अभी तक 10 पक्के मकान नदी में समा चुके हैं. नदी का जलस्तर कम हुआ है, लेकिन कटान जारी है. बाढ़ नियंत्रण विभाग कटान को रोकने के लिए काम कर रहा है.
एसडीएम ने ग्रामीणों से अपील की कि घबराएं नहीं. उन्होंने कहा कि प्रशासन कटान को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. अगर कटान से घर को क्षति पहुंचती है तो प्रशासन मदद उपलब्ध कराएगा. मंदिर और मस्जिद को बचाने के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं. करीब 20 साल बाद नदी की धारा गांव की तरफ आई है. पूरी कोशिश की जा रही है कि कटान से कम से कम नुकसान हो.
बाढ़ पीड़िता सुनीता ने से बातचीत में कहा, “जहां मैं पैदा हुई, पले-पढ़े हुए, वही घर आज घाघरा नदी में चला गया है. वहीं, शासन-प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है और कह रहा है कि बांध कटने पर कार्रवाई करेंगे. बाढ़ और शासन की लापरवाही की वजह से गांव में 4 लोगों की मौत हुई है. Government हमें घर बनवाने के लिए जमीन के साथ पैसे भी दे.”
स्थानीय निवासी शत्रुघ्न ने कहा, “भले ही मंदिर और मस्जिद के पास नदी की धारा पहुंच गई है, लेकिन गिरेगी नहीं. मंदिर और मस्जिद पर ईश्वर की कृपा है. गांव में बनी मंदिर और मस्जिद काफी पुरानी है.”
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ओपी/एएस