झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की तीन परीक्षाओं की नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर फैसला सुरक्षित रखा

रांची, 12 अक्टूबर . Jharkhand हाईकोर्ट ने Jharkhand लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के राज्य Government के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर Monday को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया.

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने प्रार्थियों और राज्य Government को Thursday तक संक्षिप्त लिखित नोट दाखिल करने का समय दिया है. अंतिम बहस के दौरान अदालत ने कहा कि नियुक्ति परीक्षा रद्द करने के मामले में Supreme Court का आदेश स्पष्ट है. अब यह विचार किया जाएगा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं के लिए दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग किया जा सकता है या नहीं.

अदालत ने यह भी कहा कि इस पहलू पर विचार करना होगा कि क्या परीक्षा प्रणाली इतनी दूषित हो चुकी है कि दोषियों और निर्दोषों के बीच अंतर करना संभव नहीं रह गया है. सुनवाई के दौरान प्रार्थियों, हस्तक्षेपकर्ताओं और राज्य Government की ओर से अपने-अपने तर्क रखे गए.

अदालत ने कहा कि तथ्यों के विश्लेषण के बाद मामले में आदेश पारित किया जाएगा. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने दलील दी कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल को अनियमितताओं में संलिप्त बताकर पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि एजेंसी के खिलाफ साजिश में शामिल होने का निष्कर्ष अभी नहीं निकाला जा सकता और यह जांच का विषय है. मामले में अनुसंधान जारी है. प्रार्थियों ने यह भी दलील दी कि नियुक्तियां हो जाने के बाद उन्हें रद्द करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां सामूहिक रूप से एक अधिसूचना जारी कर रद्द नहीं की जा सकतीं.

वहीं, हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने आरोप लगाया कि 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा और सीडीपीओ परीक्षा में टीडीपीएल के माध्यम से कथित तौर पर 50-50 लाख रुपए लेकर कई अभ्यर्थियों को पास कराया गया. राज्य Government की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत को बताया कि परीक्षाओं में अनियमितताओं के संकेत कई बिंदुओं से मिले हैं और इनके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य एवं दस्तावेज मौजूद हैं.

Government की ओर से कहा गया कि सीआईडी की जांच में कई गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच में परीक्षा में पैसे के लेनदेन से संबंधित तथ्य सामने आए हैं. राज्य Government ने अदालत में सीलबंद रिपोर्ट भी पेश की. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया.

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एसएनसी/एमएस

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