झारखंड में नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर अदालती रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने 48 घंटे में मांगा जवाब

रांची, 15 सितंबर . Jharkhand हाईकोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समेत सीडीपीओ, एफएसओ और जेएसएससी सीजीएल के अधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य Government के फैसले पर लगी रोक Tuesday को बरकरार रखी. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य Government को मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी.

सुनवाई के दौरान राज्य Government की ओर से अदालत को बताया गया कि सीआईडी की ओर से की जा रही जांच की अब तक की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएगी. Government की ओर से जांच की स्थिति से संबंधित शपथपत्र दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई. Government की ओर से एक सप्ताह का समय मांगा गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया और जवाब दाखिल करने के लिए 48 घंटे का समय दिया.

अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि मामला बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मियों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसमें अनावश्यक देरी नहीं की जा सकती. सुनवाई के दौरान अदालत ने सीआईडी जांच की गति को लेकर भी टिप्पणी की और Government से समयबद्ध तरीके से स्थिति स्पष्ट करने को कहा. मामले में जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने पक्ष रखा. प्रार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स, चंचल जैन समेत अन्य ने बहस की.

राज्य Government की ओर से महाधिवक्ता के साथ Supreme Court की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने भी पक्ष रखा. यह विवाद राज्य Government द्वारा उन परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले के बाद सामने आया है, जिनमें परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी टीडीपीएल की भूमिका रही थी. Government ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं परीक्षा, जेपीएससी-सीजीएल, सीडीपीओ, एफएसओ और जेएसएससी-सीजीएल समेत अन्य परीक्षाओं से संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया था.

Government के इस फैसले से प्रभावित नियुक्त अभ्यर्थियों और कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया. उनका कहना है कि नियुक्तियों को सामूहिक रूप से रद्द करने से उनके अधिकार और भविष्य प्रभावित हो रहे हैं. पिछली सुनवाइयों में हाईकोर्ट ने प्रार्थियों को अंतरिम राहत देते हुए Government के आदेश पर रोक लगाई थी.

एसएनसी/पीएम

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