जीएसटी 2.0 की ओर बढ़ता भारत: कर व्यवस्था के दूसरे दशक को आकार दे सकते हैं ये 6 बड़े सुधार

New Delhi, 29 अगस्त . वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के लगभग एक दशक बाद अब India की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एक नए चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है. Saturday को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, GST परिषद की 57वीं बैठक India की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के विकास में एक महत्वपूर्ण चरण साबित हो सकती है. उम्मीद की जा रही है कि बैठक में दरों के तर्कसंगतीकरण से आगे बढ़कर कर विवादों को कम करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था को मजबूत बनाने, पुराने कर क्रेडिट से जुड़े मुद्दों को हल करने और प्रौद्योगिकी-आधारित अनुपालन प्रणाली विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

ग्रांट थॉर्नटन India के पार्टनर और कर विवाद प्रबंधन प्रमुख मनोज मिश्रा के अनुसार, GST के दूसरे दशक में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में यह बैठक महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि GST परिषद के सुधारों के अगले चरण में सबसे बड़ी आवश्यकता करदाताओं के बीच विश्वास, स्पष्टता और सरलता बढ़ाने की है. इसी दिशा में छह प्रमुख सुधार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

ध्यान देने योग्य प्रमुख क्षेत्रों में से एक GST संबंधी मुकदमों में कमी लाना है. GST लागू होने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर विवाद सामने आए हैं. विशेष रूप से ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में गेम्सक्राफ्ट मामले पर Supreme Court के फैसले के बाद लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की संभावित कर मांग का मुद्दा चर्चा में है.

उद्योग का तर्क है कि वह वर्षों से प्रचलित कानूनी व्याख्या के आधार पर प्लेटफॉर्म शुल्क पर 18 प्रतिशत GST का भुगतान करता रहा है. ऐसे में GST परिषद भविष्य में ऐसे मामलों के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था ला सकती है, जिससे लंबे कानूनी विवादों में कमी आए.

एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार क्षेत्र इनपुट टैक्स क्रेडिट है. वर्तमान व्यवस्था में खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट कई बार इस बात से जुड़ जाता है कि विक्रेता ने Government को कर जमा किया है या नहीं. इससे ईमानदार करदाताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि वे आपूर्तिकर्ता के कर अनुपालन को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते.

यदि खरीदार के पास वैध कर चालान हो, उसने भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया हो और किसी मिलीभगत में शामिल न हो, तो उसे कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए. इससे विवाद कम होंगे और GST की मूल अवधारणा मजबूत होगी.

इसके अलावा, कई उद्योग अभी भी मुआवजा उपकर (कंपनसेशन सेस) से जुड़े क्रेडिट और समायोजन के मुद्दों पर स्पष्टता चाहते हैं. फरवरी 2026 से कुछ वस्तुओं पर मुआवजा उपकर समाप्त करने की सिफारिश के बाद कंपनियां पुराने क्रेडिट के उपयोग और निपटान के बारे में निश्चितता चाहती हैं.

GST परिषद इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर सकती है, जिससे उद्योगों की लंबित चिंताएं दूर होंगी.

वहीं, पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन और प्राकृतिक गैस अभी भी GST से बाहर हैं. इसके कारण विभिन्न स्तरों पर करों का बोझ बढ़ जाता है और लागत शृंखला में करों का प्रभाव बना रहता है.

इन उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से GST में शामिल करने से विनिर्माण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की लागत कम हो सकती है तथा एकीकृत कर व्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था एक और क्षेत्र है जहां व्यवसाय अधिक स्पष्टता की तलाश कर रहे हैं. ऐप-आधारित यात्री परिवहन पर GST अधिनियम की धारा 9 (5) के लागू होने से अनिश्चितता उत्पन्न हुई है, क्योंकि प्लेटफॉर्म-आधारित मॉडल विकसित हो रहे हैं.

GST परिषद डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका, नियंत्रण और जिम्मेदारी के आधार पर स्पष्ट ढांचा तैयार कर सकती है, जिससे कर अनुपालन आसान होगा.

GST 2.0 का सबसे महत्वपूर्ण आधार टेक्नोलॉजी हो सकती है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिसिस और उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से करदाताओं को पहले से अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और पूर्वानुमेय अनुपालन व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकती है.

इससे नोटिस, जांच और विवादों की संख्या कम होगी तथा व्यवसायों के लिए कर व्यवस्था अधिक आसान बनेगी.

विशेषज्ञों के अनुसार, GST के पहले दशक का मुख्य लक्ष्य पूरे देश में एक समान कर प्रणाली स्थापित करना था. अब दूसरे दशक में प्राथमिकता सरलीकरण, अनुपालन में आसानी, करदाताओं का विश्वास बढ़ाने और विवाद कम करने पर हो सकती है.

यदि ये सुधार लागू होते हैं, तो GST 2.0 केवल कर संग्रह का माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने वाला एक अधिक परिपक्व और सक्षम कर ढांचा बन सकता है.

डीबीपी

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