
चंडीगढ़, 24 सितंबर . Enforcement Directorate (ईडी) ने मेसर्स तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत सर्च और सर्वे की कार्रवाई की.
यह कार्रवाई तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, एमबी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, मेरा बाबा रियल्टी एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों, निदेशकों और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर की गई.
इसी दौरान पीएमएलए की धारा 16 के तहत ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी और पंजाब Government के आवास एवं शहरी विकास विभाग के कार्यालयों में भी सर्वे किया गया. ईडी के मुताबिक, ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी से आरोपी संस्थाओं से जुड़े सबूत जुटाने के लिए शुरू किए गए सर्वे को बाद में सर्च में बदला गया, ताकि कथित आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और सामग्री जब्त की जा सके.
ईडी ने सीबीआई की एक First Information Report के आधार पर जांच शुरू की थी. इसमें तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों पर 238 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी और पैसों को निजी फायदे के लिए निकालने का आरोप लगाया गया था.
ईडी के अनुसार, सर्च से पहले की जांच में बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन, फर्जी शेयर प्रीमियम और कई अन्य वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी सामने आई. एजेंसी ने आरोप लगाया कि तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के प्रमोटर जगमोहन गर्ग और मनमोहन गर्ग एनएसईएल घोटाले समेत कई मामलों से जुड़े रहे हैं. इनमें रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के वैधानिक बकाये की कथित अवैध माफी और रद्द प्लॉट का दोबारा आवंटन भी शामिल है.
ईडी के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेसर्स रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को वैधानिक बकाया माफ करने के जरिए करीब 57 करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ दिया गया. एजेंसी ने इसमें ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की कथित मिलीभगत की आशंका जताई है. ईडी के अनुसार, इससे जुड़ी जानकारी पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पहले ही साझा की जा चुकी है.
सर्च और सर्वे के दायरे में प्रमुख सचिव विकास गर्ग आईएएस, मुख्य प्रशासक संदीप ऋषि आईएएस, अतिरिक्त मुख्य प्रशासक अमरिंदर मल्ही पीसीएस, भूमि अधिग्रहण कलेक्टर रोहित जिंदल पीसीएस, ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व मुख्य प्रशासक राजीव गुप्ता आईएएस, टीला कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक कीर्ति साधु बास और रेमिगेट बिल्डएस्टेट तथा तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के निदेशक और प्रमोटर शामिल थे.
ईडी ने सर्च के आधार पर आरोप लगाया कि आप नेता सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया मास्टर प्लान और साइट नीलामी से जुड़े मामलों को लेकर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिकारियों के साथ नियमित रूप से अनौपचारिक बैठकें करते थे.
एजेंसी ने आरोप लगाया कि ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी की नई नीलामी, अधिग्रहण और मुआवजा तय करने समेत महत्वपूर्ण फैसले कथित तौर पर सत्येंद्र जैन के निर्देशों पर अनौपचारिक तरीके से लिए जाते थे.
ईडी का दावा है कि वरिष्ठ ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिकारी महत्वपूर्ण फाइलों को पीयूडीए भवन से बाहर लेकर चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित मकान नंबर 926 में सत्येंद्र जैन और अमरेंद्र झा के साथ बैठक करने जाते थे. एजेंसी के मुताबिक, इन बैठकों में नीलामी और मास्टर प्लान में बदलाव जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों पर चर्चा होती थी, जिससे कथित तौर पर निजी व्यक्तियों को फायदा पहुंचाया गया.
ईडी के अनुसार, यह मकान आप नेता और पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के चेयरमैन सनी सिंह अहलूवालिया के नाम आवंटित था. एजेंसी ने आरोप लगाया कि इसका इस्तेमाल सत्येंद्र जैन द्वारा ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के कामकाज को कथित तौर पर प्रभावित करने और अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया जाता था, जिससे Governmentी खजाने को नुकसान हुआ.
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि सत्येंद्र जैन के ओएसडी अमरेंद्र झा बिना किसी आधिकारिक पद के पीयूडीए भवन के भीतर एक कमरे का कथित तौर पर इस्तेमाल करते थे और ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के महत्वपूर्ण फैसलों पर निर्देश देते तथा प्रभाव डालते थे. एजेंसी ने इसके पीछे राजनेताओं और निजी व्यक्तियों को आर्थिक लाभ पहुंचाए जाने का आरोप लगाया है.
ईडी के मुताबिक, कुछ अधिकारियों के जब्त मोबाइल फोन में पंजाब Government के राजनेताओं के रिश्तेदारों को कथित हवाला भुगतान से जुड़ी चैट भी मिली हैं.
एजेंसी ने आरोप लगाया कि कीर्ति साधु बास और अर्चना झा के नियंत्रण वाली मेसर्स टीला कंसल्टेंसी लिमिटेड ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी और पीयूडीए भवन के परिसर से काम कर रही थी. कंपनी कथित तौर पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के भूमि अधिग्रहण से जुड़े कर्मचारियों के साथ मिलकर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 के तहत अवॉर्ड और भुगतान के मामलों में कई अनियमितताओं में शामिल थी.
ईडी के अनुसार, सर्च में मुआवजे के भुगतान से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आईं. एजेंसी का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 11 के तहत अधिसूचना के बावजूद कलेक्टर की छूट के बिना ट्रांसफर डीड करने की अनुमति दी गई. लेटर ऑफ इंटेंट जारी करने में भी कथित अनियमितताएं मिलीं, जहां एक ही खसरे के सह-हिस्सेदारों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया गया.
ईडी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के नहीं बिके लैंड बैंक के रिजर्व प्राइस को नीलामी से पहले कथित तौर पर गलत तरीके से कम किया गया. एजेंसी के मुताबिक, इससे ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी और पंजाब Government को करीब 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने और बिल्डरों तथा राजनेताओं को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई.
ईडी ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्च के दौरान ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी कार्यालय को आम जनता के लिए खुला और चालू रखा गया था. अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों की आवाजाही पर पाबंदी नहीं लगाई गई थी. डाक पोर्टल और पब्लिक सहायता काउंटर भी खुले रहे. ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के इंजीनियरिंग, प्रशासन और बजट विंग समेत अन्य कार्यालय सामान्य रूप से काम करते रहे.
एजेंसी के मुताबिक, जिन अधिकारियों के यहां सर्च की गई, उन्हें पर्याप्त आराम, भोजन और मेडिकल सुविधाएं दी गईं और परिवार के सदस्यों से बातचीत करने की अनुमति भी दी गई.
इस कार्रवाई के दौरान पंजाब Government ने 23 सितंबर 2026 की देर रात बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की. इसमें आरोप लगाया गया था कि ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी और राज्य Government के अधिकारियों को 22 सितंबर से ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी मुख्यालय में अवैध रूप से रोका गया है. याचिका में अधिकारियों की रिहाई और सर्च की कार्रवाई में हस्तक्षेप की मांग की गई.
पंजाब एवं Haryana हाई कोर्ट ने 24 सितंबर के लिए नोटिस जारी करते हुए रजिस्ट्रार (एडमिन-II) राजन नंदा को वारंट ऑफिसर नियुक्त किया और उन्हें परिसर में जाकर स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया.
वारंट ऑफिसर 24 सितंबर को तड़के करीब 2.50 बजे परिसर में पहुंचे, जहां उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की और सर्च तथा सर्वे की मूल अनुमति, पंचनामे और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की.
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा गया और न ही उन पर अनुचित दबाव डाला गया. उन्हें परिवार के सदस्यों से संपर्क और भोजन लेने की अनुमति थी, जबकि महिला स्टाफ को शाम में जाने दिया गया था.
ईडी ने वारंट ऑफिसर को बताया कि इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की डाउनलोडिंग, कॉपी और क्लोनिंग के लिए अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी थी. हालांकि, वे अपनी जगह किसी दूसरे अधिकारी को अधिकृत करने के बाद जा सकते थे.
इसके बाद सर्च की कार्रवाई पूरी होने पर पंजाब Government ने 24 सितंबर को अपनी याचिका वापस लेने की मांग की. हाई कोर्ट ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया. साथ ही Government को उचित मंच पर कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी और संबंधित मुद्दों को भविष्य में उठाए जाने की स्थिति में विचार के लिए खुला रखा.
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एएमटी/डीकेपी