
New Delhi, 26 सितंबर . विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर एक अखबार के खुलासे और देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच चुनाव आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी प्रेस नोट पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है.
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने Saturday को बयान जारी कर कहा कि आयोग का प्रेस नोट न तो खबर का सीधे तौर पर खंडन करता है और न ही उसके निष्कर्षों को निराधार बताता है. पैरा 3(i) और 3(ii) में मामले को हल्का करने की रक्षात्मक कोशिश की गई है.
जयराम रमेश ने कहा कि गोवा में पकड़े जाने के बाद आयोग ने कहा कि हटाए गए 97 में से 81 मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 भरकर उन्हें वापस जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है. कांग्रेस ने कहा, “दूसरे शब्दों में आप एक टूटी और भ्रष्ट व्यवस्था से मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करते हैं और पकड़े जाने पर कहते हैं कि उन्हें वापस जोड़ा जा रहा है.”
कांग्रेस नेता ने कहा कि आयोग अपने कदमों को 27 मई 2026 के Supreme Court के आदेश का हवाला देकर सही ठहरा रहा है. कांग्रेस ने कहा कि यह आदेश हालिया खुलासों से बहुत पहले का है और यह सीईसी को लक्षित मतदाताओं के दुर्भावनापूर्ण तरीके से नाम हटाने, अक्षमता के कारण नागरिकों को वोटर लिस्ट से हटाने और पूरे परिवारों को हुई परेशानी, खर्च और समय की बर्बादी से नहीं बचा सकता.
उन्होंने कहा कि आयोग ने दिल्ली और Maharashtra में दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाई है, लेकिन कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं का क्या? कांग्रेस ने पूछा कि इन राज्यों में एक व्यक्ति के भ्रष्टाचार के कारण जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, क्या उन्हें जवाब नहीं मिलना चाहिए?
प्रेस नोट में कहा गया है कि ईसीआईनेट पोर्टल की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा. कांग्रेस ने इसे निरर्थक सुरक्षा उपाय बताया. पार्टी का कहना है कि चिंता तकनीकी मजबूती की नहीं, बल्कि केंद्रीकरण की है जो जमीनी स्तर पर मतदाता जोड़ने से रोकता है. यह कदम दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की चिंताओं की पुष्टि करता है.
कांग्रेस ने कहा कि प्रेस नोट जेन जी वोटर्स को जानबूझकर निशाना बनाने के सवालों का जवाब नहीं देता. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जुलाई 2026 के मध्य से फॉर्म-6 में पूरी तरह से अवैध बदलाव किए गए, जो संसद से अनदेखे और अननुमोदित थे, जिसने उन पर अपने माता-पिता और/या दादा-दादी का विवरण खोजने और बताने का अनुचित बोझ डाला.
जयराम रमेश ने कहा कि (1) सीईसी द्वारा एकतरफा फैसले लेना, (2) विपक्ष के प्रति उनकी खुली नफरत और पक्षपात, (3) सत्ताधारी शासन द्वारा ‘वोट चोरी’ में उनकी इच्छुक भागीदारी, (4) जेन जी वोटर्स के नामांकन को रोकने के लिए उनका विशेष हमला, (5) वोटर लिस्ट की सफाई में उनकी लापरवाही से उजागर हुआ भ्रष्टाचार, इन सभी का जवाब देना होगा.
कांग्रेस ने कहा कि सीईसी सोचते हैं कि वह नौकरशाही और प्रोटोकॉल के पीछे छिप सकते हैं, लेकिन वह बेनकाब हो चुके हैं और अब डरे हुए हैं क्योंकि पूरा देश उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहता है. पार्टी ने मांग की कि करोड़ों भारतीयों के मताधिकार से बड़े पैमाने पर वंचित करने का तरीका बन चुकी एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत निलंबित किया जाए और तब तक सीईसी के इस्तीफे या उन पर मुकदमा चलाने से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा.
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डीएससी