
गांधीनगर, 12 सितंबर . Gujarat के Chief Minister भूपेंद्र पटेल ने Saturday को कहा कि जलवायु परिवर्तन, समुद्र का बढ़ता जलस्तर, तटीय कटाव, समुद्री प्रदूषण और प्लास्टिक कचरा बड़ी वैश्विक चिंताएं बन गए हैं.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुद्र तट के किनारे आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और समुद्री जैव-विविधता को बचाना भी जरूरी है.
सीएम भूपेंद्र पटेल Ahmedabad की Gujarat यूनिवर्सिटी में ‘तटीय पारिस्थितिकी, सुरक्षा और स्थिरता’ पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें प्रगति के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण, उद्योग के साथ पर्यावरण की सुरक्षा और रोजगार के साथ समुद्री जैव-विविधता की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो.
Chief Minister ने कहा, “Gujarat का समुद्र तट सिर्फ एक भौगोलिक सीमा नहीं है. यह विकास का रास्ता है, समुद्री व्यापार का दरवाजा है, सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और लाखों लोगों की आजीविका का स्रोत है.”
उन्होंने कहा कि Gujarat की समुद्री परंपरा बहुत पुरानी है और राज्य के व्यापारी हजारों साल पहले लोथल के प्राचीन बंदरगाह के जरिए दुनिया से जुड़े हुए थे. उन्होंने आगे कहा, “आज मुंद्रा और कांडला जैसे बंदरगाहों ने Gujarat को वैश्विक व्यापार के नक्शे पर ला खड़ा किया है.”
सीएम भूपेंद्र पटेल ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi ने समुद्र तट की क्षमता को पहचाना और इसे बंदरगाहों, व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, मछली पालन, पर्यटन और पर्यावरण के विकास के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में देखा. उन्होंने कहा कि यह सोच देश की ‘ब्लू इकोनॉमी’ नीति और Prime Minister Narendra Modi के ‘सप्तधारा’ के विजन में झलकती है.
Chief Minister ने मैंग्रोव की पारिस्थितिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे तटीय गांवों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करते हैं, मछुआरों की आजीविका में मदद करते हैं और कई जलीय प्रजातियों को रहने की जगह देते हैं.
उन्होंने कहा, “चक्रवात और तूफान के दौरान, मैंग्रोव तटीय इलाकों के लिए प्राकृतिक ढाल का काम करते हैं.”
पटेल ने मैंग्रोव संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए Governmentी प्रयासों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा सिर्फ Government की जिम्मेदारी नहीं हो सकती और तटीय पारिस्थितिकी का संरक्षण Government और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है.
उन्होंने पारंपरिक समुद्री मछली पकड़ने वाले समुदायों, या ‘सागर खेदु’ को “समुद्र का रक्षक” बताया और कहा कि ‘सागरखेदु सर्वांगी विकास योजना’, आधुनिक नावों, डीजल सब्सिडी, सुरक्षा उपकरणों और सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन सुविधाओं के जरिए उनकी आजीविका और सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, “समुद्री सुरक्षा में टेक्नोलॉजी तेजी से अहम भूमिका निभा सकती है. सैटेलाइट मॉनिटरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और स्मार्ट नावें समुद्र की निगरानी और सुरक्षा में मदद कर सकती हैं.”
उन्होंने कहा कि Gujarat में टेक्नोलॉजी, प्रशासन और मानवीय संवेदना के तालमेल से चक्रवात के दौरान किसी की जान नहीं गई. इससे पता चलता है कि भले ही आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन तैयारी के जरिए जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि Gujarat ग्रीन पोर्ट, सस्टेनेबल शिपिंग, तटीय कनेक्टिविटी, सस्टेनेबल मछली पालन और जिम्मेदार तटीय पर्यटन के जरिए विकास का एक नया मॉडल विकसित कर सकता है. उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच कोई टकराव नहीं है, बल्कि वे साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं.”
सीएम पटेल ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस से निकले विचारों को सिर्फ चर्चाओं और पेपर प्रेजेंटेशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें Governmentी नीतियों को नई दिशा देनी चाहिए. Chief Minister पटेल ने कार्यक्रम के दौरान Gujarat यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया और यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक डिजिटल रिपॉजिटरी का उद्घाटन किया.
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एएसएच/डीकेपी