जन्मतिथि विशेष: पृथ्वी शॉ की तुलना कभी सचिन और सहवाग से हुई, अब आईपीएल टीम में जगह नहीं मिल रही

New Delhi, 8 नवंबर . Mumbai ने भारतीय क्रिकेट को एक से बढ़कर एक बल्लेबाज दिए हैं. इनमें सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर, सचिन तेंदुलकर और रोहित शर्मा का नाम प्रमुख है. 2018 में एक और खिलाड़ी के इन दिग्गजों की सूची में शामिल होने की संभावना थी, लेकिन फिलहाल वह खिलाड़ी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, नाम है पृथ्वी शॉ.
पृथ्वी शॉ का जन्म 9 नवंबर 1999 को Maharashtra के ठाणे में हुआ था. दाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज शॉ सबसे पहले 14 साल की उम्र में 2013 में चर्चा में आए थे. शॉ ने हैरिस शील्ड में अपने स्कूल रिजवी स्प्रिंगफील्ड की ओर से खेलते हुए 330 गेंदों में 85 चौकों और 5 छक्कों के साथ 546 रन बनाए. यह उस दौर में स्कूल क्रिकेट का सर्वोच्च स्कोर था.
लगातार दमदार प्रदर्शन के दम पर शॉ को India की अंडर-19 टीम में जगह मिली. वह 2016 में अंडर-19 एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे. करीब 2 महीने बाद ही उन्होंने रणजी ट्रॉफी में Mumbai की ओर से डेब्यू किया और तमिलनाडु के खिलाफ दूसरी पारी में शतक जड़कर टीम को जीत दिलाई. 17 साल 320 दिन की उम्र में शॉ ने दलीप ट्रॉफी में डेब्यू करते हुए शतक लगाया. वह ऐसा करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने. इससे पहले दलीप ट्रॉफी में शतक जड़ने वाले युवा खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर थे.
साल 2018 में पृथ्वी शॉ ने अपनी कप्तानी में India को अंडर-19 विश्व कप विजेता बनाया. इस सफलता ने पृथ्वी को देश-दुनिया में लोकप्रिय बना दिया. उसी साल आईपीएल फ्रेंचाइजी दिल्ली डेयरडेविल्स ने 1.2 करोड़ रुपये में उन्हें अपने साथ जोड़ा था. अपने पहले ही सीज़न में शॉ ने 9 मैचों में 245 रन बनाए थे.
2018 में 18 साल की उम्र में शॉ को भारतीय टीम की तरफ से वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू का मौका मिला. शॉ ने अपनी पहली पारी में शतक लगा दिया. शॉ ने 154 गेंदों पर 134 रन की पारी खेली थी. इस पारी में शॉ की बल्लेबाजी देखकर उन्हें भारतीय टीम में भविष्य का तेंदुलकर और सहवाग माना गया.
करियर के शुरुआती दौर में मिली बड़ी सफलता को शॉ कहीं न कहीं संभाल नहीं पाए. उनकी फॉर्म और फिटनेस में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. साथ ही उन पर अनुशासन में नहीं रहने के भी आरोप लगे. इसका प्रभाव उनके करियर पर पड़ा. भारतीय टीम से बाहर होने के बाद, उन्हें अपनी घरेलू Mumbai क्रिकेट टीम से भी बाहर होना पड़ा. आईपीएल में भी मौके कम हो गए. वह पिछले दो सीज़न में एक भी आईपीएल मैच नहीं खेल पाए हैं.
इस तरह कभी सचिन और सहवाग की टक्कर के बल्लेबाज माने गए शॉ फिलहाल अपना करियर बनाने और बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि उनकी कप्तानी में खेलने वाले शुभमन गिल भारतीय टीम के कप्तान बन चुके हैं. 27 साल के होने जा रहे शॉ के पास एक क्रिकेटर के तौर पर अभी काफी समय है. वह अपनी फॉर्म और फिटनेस पर काम कर रहे हैं. Mumbai की जगह घरेलू क्रिकेट में उनका ठिकाना अब Maharashtra टीम है. वह हर फॉर्मेट में सक्रिय हैं और टीम इंडिया में वापसी की जोरदार कोशिश कर रहे हैं.
शॉ भारतीय टीम की तरफ से तीनों फॉर्मेट में खेल चुके हैं. 5 टेस्ट की 9 पारियों में 1 शतक और 2 अर्धशतक की बदौलत 339 रन, 6 वनडे की 6 पारियों में 189 रन उनके नाम दर्ज हैं. एकमात्र टी20 में उनका खाता नहीं खुला था. शॉ ने 23 जुलाई 2021 को अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच श्रीलंका के खिलाफ खेला था. यह एक वनडे मैच था.
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पीएके


