
रांची, 27 सितंबर . भारतीय जनता पार्टी के Jharkhand प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर चुनाव आयोग समेत संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी आधिकारिक बयान के बाद एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और आयोग के भीतर कथित मतभेद को लेकर विपक्ष के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट हो गई है. चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर सहित उसके प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं.
भाजपा प्रदेश कार्यालय में Sunday को आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है. चुनाव आयुक्तों के संयुक्त बयान के बाद कांग्रेस की मनगढ़ंत कहानियों के जरिए जनता के बीच भ्रम फैलाने की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त हो गई है.
साहू ने कहा कि 24 जून 2025 को जारी राष्ट्रव्यापी एसआईआर का मूल आदेश और बाद में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी कार्यक्रम आयोग की सर्वसम्मति से स्वीकृत थे. चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी अपने बयान में भी कहा कि 24 जून 2025 का एसआईआर आदेश पूरे आयोग की सर्वसम्मति से जारी हुआ था और इसे 27 मई 2026 के Supreme Court के फैसले में बरकरार रखा गया.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष द्वारा आयोग में मतभेद के आरोप लगाए जा रहे थे, जबकि आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि अलग-अलग स्तर पर विचार या सुझाव सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने फॉर्म-6 को लेकर भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया. एसआईआर के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 से संबंधित घोषणा को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है.
चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा है कि फॉर्म-6 में एसआईआर के संदर्भ में की गई व्यवस्था को Supreme Court के समक्ष चुनौती दी गई थी और अदालत ने संबंधित प्रक्रिया को बरकरार रखा है. साहू ने कहा कि आयोग का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है. उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से छूटे हुए लोगों तक पहुंचने, घर-घर जाकर दस्तावेज लेने और जरूरतमंद मतदाताओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं.
उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव हारने के बाद कभी ईवीएम, कभी चुनाव आयोग और कभी अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने राहुल गांधी के पूर्व बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को तथ्यों और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता का सम्मान करना चाहिए. साहू ने कहा कि चुनाव आयोग के ताजा बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व को अपने आरोपों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस से संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ लगाए गए कथित बेबुनियाद आरोपों के लिए बिना शर्त माफी मांगने की मांग की.
–
एसएनसी/एसके