चीन की अपील, अमेरिका और ईरान युद्ध रोकें और बातचीत आगे बढ़ाएं

बीजिंग, 28 अक्टूबर . चीन ने अमेरिका और ईरान समेत सभी संबंधित पक्षों से संघर्ष रोकने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है. संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने Tuesday को सुरक्षा परिषद में ईरान के परमाणु मुद्दे पर आयोजित खुली बैठक में यह बात कही.
फू त्सोंग ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर क्षेत्रीय और वैश्विक शांति तथा स्थिरता पर पड़ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकी हुई है. वहीं, ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की तैयारियों से जुड़ी खबरें भी तनाव बढ़ा रही हैं.
उन्होंने कहा कि अमेरिका का ईरान परमाणु समझौते से एकतरफा बाहर निकलना, प्रतिबंधों को फिर से लागू करना और उन्हें लगातार बढ़ाना तथा अधिकतम दबाव बनाने की नीति अपनाना मौजूदा गतिरोध की प्रमुख वजह है.
उन्होंने आगे कहा कि यूरोप के तीन देशों ने ईरान परमाणु समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं, लेकिन अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों का समर्थन किया.
फू त्सोंग के मुताबिक, इन देशों की ओर से प्रतिबंधों को तेजी से फिर से लागू करने की प्रक्रिया कानूनी और प्रक्रियागत रूप से गलत है. इससे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एकजुटता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इजरायल ने दो बार ईरान की उन परमाणु सुविधाओं पर सैन्य हमले किए, जो अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में थीं. इन हमलों के कारण एजेंसी के लिए उन सुविधाओं की निगरानी जारी रखना मुश्किल हो गया. इसके बावजूद, कुछ देशों ने इन परिस्थितियों को नजरअंदाज करते हुए आईएईए में ईरान की निगरानी से जुड़ा प्रस्ताव पारित कराया.
फू त्सोंग ने इसे Political उद्देश्यों से प्रेरित कदम बताया और कहा कि इससे आईएईए तथा ईरान के बीच सहयोग को नुकसान पहुंचता है.
फू त्सोंग ने जोर देकर कहा कि ईरान परमाणु समझौते और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2231 से यह स्पष्ट होता है कि परमाणु मुद्दे का समाधान केवल Political और कूटनीतिक बातचीत से ही संभव है. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन करना चाहिए.
साथ ही, सभी पक्षों को परमाणु अप्रसार संधि के सदस्य के रूप में ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल के अधिकार का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने अमेरिका से ईरान पर सैन्य हमला नहीं करने की प्रतिबद्धता जताने की अपील भी की, ताकि किसी सैन्य दबाव के बिना परमाणु निगरानी का काम प्रभावी ढंग से जारी रह सके.
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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