ग्रीन एआई और स्वास्थ्य तकनीक में भारत-जर्मनी मिलकर तलाशेंगे नए अवसर

New Delhi, 04 सितंबर आईआईटी दिल्ली व जर्मनी के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य और मानसिक सेहत पर एक खास मंथन किया है. इसका मुख्य विषय ‘ग्रीन एआई’ यानी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना तकनीक का उपयोग करना था. यहां यह बात सामने आई कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़े और भारी-भरकम कंप्यूटर मॉडलों की जरूरत नहीं होती है.

विशेषज्ञों ने बताया कि इसके लिए छोटे और निजी डिवाइस मॉडल ज्यादा बेहतर हैं, क्योंकि वे मरीजों के संवेदनशील डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखते हैं. यहां दोनों देशों के विशेषज्ञों ने मेडिकल इमेजिंग, क्लिनिकल निर्णय सहायता, मानसिक स्वास्थ्य और बहुभाषी स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में एआई के नवीन अनुप्रयोगों का पता लगाने की दिशा में पहल की. विभिन्न स्वास्थ्य सेवा व्यवस्थाओं में एआई से जुड़ी तकनीकी, बुनियादी ढांचे व चुनौतियों की पहचान करना भी इसका लक्ष्य था.

साथ ही, India और जर्मनी के बीच शैक्षणिक, नैदानिक और उद्योग जगत के सहयोग को बढ़ावा देना व भविष्य में संयुक्त अनुसंधान का रोडमैप तैयार करने पर फोकस रहा. इस कार्यशाला का मुख्य केंद्र स्वास्थ्य सेवा में जनरेटिव एआई के पर्यावरणीय प्रभावों को समझना रहा. साथ ही ऐसे ऊर्जा-कुशल मॉडल तैयार करना भी इसका उद्देश्य था जो वास्तविक दुनिया में काम आ सकें.

बैठक का उद्देश्य मेडिकल इमेजिंग, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट और बहुभाषी स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में एआई के नए उपयोगों को खोजना और भारत-जर्मनी के बीच अकादमिक व औद्योगिक सहयोग को मजबूत करना था. आईआईटी दिल्ली में ‘ग्रीन एआई फॉर हेल्थकेयर एंड मेंटल वेलनेस’ विषय पर यह दो दिवसीय कार्यशाला 3 व 4 सितंबर तक चली. यह आयोजन इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर द्वारा प्रायोजित था.

दरअसल यह केंद्र India के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और जर्मनी के शिक्षा मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है. इसका संचालन आईआईटी दिल्ली के प्रो. तन्मय चक्रवर्ती और जर्मनी की ट्यू डर्मस्टाड की प्रो. इरीना गुरेविच ने किया. इसमें दोनों देशों के 30 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए. इस दौरान इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर की निदेशक डॉ. कुसुमिता अरोड़ा ने कहा कि यह पहल दोनों देशों की ताकतों को जोड़कर ग्रीन एआई और स्वास्थ्य से जुड़ी साझा चुनौतियों का समाधान करेगी.

आईआईटी दिल्ली के प्रो. तन्मय चक्रवर्ती ने बताया कि एआई का अगला दौर केवल बड़े मॉडल बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे सिस्टम तैयार करना है जो टिकाऊ, भरोसेमंद और सुलभ हों. वहीं, ट्यू डर्मस्टाड की प्रो. इरीना गुरेविच ने मानसिक स्वास्थ्य पर एक बहुत ही खास बात रखी. उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘ग्रीन एआई’ का मतलब केवल ऊर्जा दक्षता नहीं है, बल्कि इसके लिए बड़े मॉडलों के बजाय छोटे और निजी ‘ऑन-डिफ़ाइस’ मॉडल बेहतर हैं जो संवेदनशील डेटा को स्थानीय स्तर पर पूरी तरह सुरक्षित रखते हैं. आने वाले समय में चिकित्सक, मरीज और एआई को एक टीम के रूप में मिलकर काम करना होगा.

जीसीबी/पीएम

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