पीएम मोदी के नेतृत्व में आपदा प्रबंधन में बदलाव आया : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

New Delhi, 10 सितंबर . केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने Thursday को कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में आपदा प्रबंधन के नजरिए और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव आया है.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट (एनआईडीएम) की गवर्निंग बॉडी की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए, गृह मंत्री ने कहा कि मोदी Government ने पूरे डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम को पूरी तरह से बदल दिया है, ‘जीरो कैजुअल्टी’ का लक्ष्य तय किया है. देश को इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ाया है.

उन्होंने कहा, “हमने ‘जीरो कैज़ुअल्टी’ के साथ कई आपदाओं का सफलतापूर्वक सामना भी किया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है. पहले आपदाओं को केवल राहत और पुनर्वास के नजरिए से देखा जाता था. आज, हम तीन स्तंभों – जोखिम कम करने, शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और ‘जीरो कैजुअल्टी’ – पर आधारित एक नए युग में प्रवेश कर चुके हैं. यह हम सभी के लिए गर्व की बात है.”

उन्होंने कहा कि इस दिशा में, ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ (पूरी Government का एक साथ मिलकर काम करना) का दृष्टिकोण हमारे काम करने के तरीके का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है. जब भी कोई आपदा आती है, तो Government के सभी विभाग सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देते हैं. अब, नई रिसर्च की ताकत के साथ हमें प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए और लगातार निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि जिस तरह आपदाओं से निपटने में ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ का दृष्टिकोण अपनाया गया है, उसी तरह डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम को और मजबूत करने के लिए भी हमें ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए.

उन्होंने कहा, “Prime Minister मोदी ने पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया है. आखिरकार पर्यावरण संरक्षण ही आपदाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है. पर्यावरण संरक्षण, जोखिम कम करना, लचीलापन और एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण India को धीरे-धीरे दुनिया के लिए एक मॉडल के रूप में उभरने में मदद कर रहे हैं.”

गृह मंत्री ने कहा कि एक समय था जब एनआईडीएम का पूर्ववर्ती संस्थान, नेशनल सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट, कृषि भवन के एक कोने में लगभग निष्क्रिय पड़ा था.

2003 में, तत्कालीन Prime Minister अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे नई जिंदगी देने का ऐतिहासिक फैसला किया. विषय के व्यापक दायरे और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, इस संस्थान को गृह मंत्रालय के अधीन लाने का फैसला किया गया.

एससीएच/एबीएम

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